साहब! एसपी ट्रैफिक प्राइवेट आदमियों से वसूली करवाते हैं
होमगार्डों की गुहार पर आईजी ने एसपी महराजगंज को सौंपी जांच
गोरखपुर। कहते है जब घर का भेदिया सच बोलने लगे तो कुछ भी नहीं छिपता। कुछ ऐसा ही गोरखपुर यातायात कार्यालय में भी सामने आया है। गत दिनों होमगार्ड के सहायक कमांडेंट घनश्याम गौड़ की मौत मामले की जांच भले ही अधूरी हो लेकिन मामला फिर गरमाया गया है। अब यातायात कार्यालय के होमगार्डों ने एसपी ट्रैफिक आदित्य वर्मा पर वसूली का आरोप लगाकर आईजी से शिकायत की है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए आईजी ने प्रकरण की जांच एसपी महराजगंज रोहित सिंह सजवाण को सौंपी है। आईजी ने जांच पूरी कर जल्द रिपोर्ट मांगी है।
आईजी को सौंपे गए पत्रक में कई आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि एक शख्स को निजी कंप्यूटर आपरेटर बनाया गया है और इसी के माध्यम से वसूली का खेल होता है। कई प्राइवेट आदमी सुबह से ही कार्यालय में पहुंच जाते हैं और वसूली करते हैं। जुर्माना ज्यादा लगाया जाता है और कम रुपये की रशीद काटकर बाकी रकम रख ली जाती है। शहर में चलने वाले विभिन्न वाहनों से महीना तय कर दिया गया है। जो नहीं देता है उसकी गाड़ी जांच के नाम पर परेशान किया जाता है और जुर्माने के नाम पर वसूली होती है। इसके अलावा भी कई अन्य मद से वसूली की जाती है। एसपी ट्रैफिक ने होमगार्ड राजेश सिंह को लखनऊ भेजकर ऑनलाइन चालान की ट्रेनिंग दिला दी जबकि यह नियमानुसार गलत है।
आरोप : इन वाहनों से होती है इतनी वसूली
प्राइवेट बसों से : 4500 रुपये प्रति बस (एक महीने का चार्ज)
यार्ड से गाड़ी छोड़ने पर : 300 से 500 रुपये बिना रसीद
सीज करने पर जुर्माना : वसूली 2500 से 3000 (रसीद देते है 500-1000)
ब्रेड वाहन, टैंकर, नियमित आने वाले ट्रक : दो हजार रुपये महीना
लाल पर्ची फिर से शुरू की गई (इसके आधार पर मनमानी वसूली)
अभियान तो दिखावा, वसूली का है असल खेल
होमगार्डों ने आरोप लगाया है कि यातायात कार्यालय में महीना नहीं देने पर अभियान चलाया जाता है। इस दौरान सिर्फ उसी ऑटो या बस को पकड़ जाता है जो महीना नहीं देते हैं या फिर नए आए हो जिन्हें महीने की जानकारी न हो। यार्ड में लाने के बाद बस को पहले सीज किया जाता है ताकि कानूनी रूप से कहीं ना फंसे फिर न्यूनतम जुर्माने की रसीद काटी जाती है और मोटी रकम ऐंठ ली जाती है।
ये भी हैं शामिल
आरोप है कि एसपी के वसूली के लिए टीम बनाई है। टीआई सुनील कुमार सिंघल, जेपी सिंह, एचसीपी किशोरी लाल यादव, हेड कांस्टेबल विनोद यादव, होमगार्ड राजेश सिंह, कांस्टेबल मनोहर सोनकर, अनिल मौर्या, चालक अनिल शर्मा, गार्ड धर्मेंद्र की टीम वसूली करती है। इसके अलावा कुछ अन्य प्राइवेट लोग भी हैं।
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यह हुआ था
तीन जुलाई को शाहपुर निवासी होमगार्ड विनोद की तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया। एसपी ट्रैफिक पर प्रताड़ना का आरोप लगा। चार जुलाई की सुबह ही होमगार्डों ने हड़ताल का एलान कर दिया और एसपी ट्रैफिक कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। मामला बढ़ता देख एसएसपी ने हस्तक्षेप किया। होमगार्डों का पांच सदस्यीय कमेटी ने एसएसपी से मुलाकात कर एसपी ट्रैफिक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हटाए जाने की मांग की। एसएसपी के आश्वासन पर होमगार्ड काम पर लौटे। एसपी कार्यालय पर होमगार्डों की ड्यूटी लगाने के लिए सहायक कंपनी कमांडेंट (अवैतनिक) घनश्याम भी पहुंचे थे। आरोप था कि दोपहर दो बजे के करीब एसपी आदित्य वर्मा कार्यालय में पहुंचे और घनश्याम को बुलाकर डांट लगाई। बाहर आने के बाद घनश्याम की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाया गया जहां इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद से ही होमगार्ड एसपी के खिलाफ मुखर हैं।
पत्रक के माध्यम से यह की गई मांग
एसपी की जांच कराकर कार्रवाई की जाए
वसूली बंद कराई जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके
भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो
सहायक कमांडेंट घनश्याम की मौत मामले की जांच कराकर मुकदमा दर्ज किया जाए
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होमगार्डों के आरोप बेहद गंभीर हैं। वसूली और प्रताड़ना दोनों ही शिकायत लिखित की गई है। पूरे प्रकरण की जांच एसपी महराजगंज को सौंपी गई हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - जय नारायण सिंह, आईजी, गोरखपुर रेंज