गोरखपुर प्लास्टिक प्रोडक्ट्स एसोसिएशन ने सरकार से 40 माइक्रॉन की थैलियों के इस्तेमाल करने और बेचने के लिए कम से कम छह माह की मोहलत मांगी है। ताकि, प्लास्टिक लघु उद्योग व्यापारी अपने लोन एवं राजस्व व बाजार की देनदारियां चुकता कर सकें।
रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने रातोंरात फैसला करके प्लास्टिक के कैरी बैग पर रोक लगा दी है। इससे इस व्यवसाय से जुड़े हजारों की संख्या में उद्यमियों और कामगारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उद्यमियों ने 21 दिसंबर तक वैट अदा करके 40 माइक्रॉन की प्लास्टिक की थैलियां मंगवाई हैं। एकाएक पाबंदी के बाद यह सभी बची रह गई हैं। ऐसे में राज्य सरकार कम से कम छह महीने का समय दे ताकि इसकी खपत की जा सके। यदि नहीं तो बचे हुए माल को वापस लेकर इसका मुआवजा अदा किया जाए। लेकिन सबसे बड़ी समस्या उद्यमियों के सामने आ गई है जिन्होंने इस उद्योग को लगाने के लिए बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लिया है।
महामंत्री शंभू प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के मानक के अनुसार 40 माइक्रॉन से ज्यादा मोटाई का कैरी बैग बनाया जा सकता है, लेकिन प्रदेश सरकार ने सभी पर प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि प्लास्टिक एसोसिएशन पर्यावरण पॉलीथिन की थैलियों के विकल्प के रूप में इकोफ्रेंडली बायोडिग्रिडेबल कैरी बैग बनाने की तैयारी कर रहा है, जो 45 से 60 दिन के अंदर स्वत: ही नष्ट हो जाएगा। इसके लिए एनजीटी ने भी अनुमति दे दी है। ऐसे में प्रदेश सरकार हमें भी इको फ्रेंडली बायोडिग्रेडेबल 40 माइक्रॉन के कैरी बैग बनाने की इजाजत दे। इस मौके पर मुन्ना खान समेत अन्य उद्यमी भी मौजूद थे।