गोरखपुर। राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र और आरडी जैसी किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए बचत खाता खोलने की बाध्यता को डाक विभाग ने खत्म कर दिया है। संचार मंत्रालय की ओर से डाक अधिकारियों और कर्मचारियों को मिले नए निर्देश के तहत अब डाककर्मी किसी भी ग्राहक को खाता खोलने के लिए बाध्य करने की जगह निवेदन करेंगे। पिछले दिनों भुगतान के लिए खाता खोलने की बाध्यता का निर्देश जारी करने वाले डाक मंत्रालय का रुख ग्राहकों के विरोध के चलते बदला है।
महज एक महीने पहले ही संचार मंत्रालय ने डाक विभाग से ग्राहकों को जोड़ने के लिए किसी भी योजना से मिलने वाले भुगतान से पहले बचत खाता खोलने का नियम बनाया था। यही नहीं, इस नए नियम को सख्ती से लागू करने के लिए एक जनवरी 2016 की तारीख भी तय कर दी गई थी। इसमें जहां विभाग की मंथली इनकम स्कीम, रेकरिंग डिपॉजिट, ट्रांस डिपॉजिट, सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटिजन एकाउंट, किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत पत्र जैसी स्कीम का लाभ क्रेडिट एकाउंट से मिल जाता था, उसे बचत खाते में भेजे जाने का प्रावधान बना दिया गया।
लेकिन धरातल पर उतरने से पहले ही इसे लेकर ग्राहकों की ओर से विरोध दर्ज कराया जाने लगा है। ऐसे में योजना से जुड़े ग्राहकों के हाथ से निकल जाने के भय से संचार मंत्रालय ने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और उसका एक लचीला रास्ता निकाल लिया। बदले निर्णय में डाक कर्मचारियों को यह निर्देशित किया गया है कि वे योजनाओं से जुड़े ग्राहकों को बचत खाता खोलने के लिए बाध्य न करें बल्कि उनके सामने खाताधारक बनने के बाद मिलने वाले लाभ का प्रलोभन दें। इससे ग्राहक खुद ही खाताधारक बनने की इच्छा व्यक्त कर देगा। मंत्रालय की ओर से बदले निर्देश के पालन में डाक विभाग जुट गया है