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तीन बेटों ने बचाई पिता की विरासत

Sun, 12 Mar 2017 12:59 AM IST
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
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चिल्लूपार विधानसभा सीट से जीते बसपा के विनय शंकर ‌तिवारी। - फोटो : Amar Ujala
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विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबरदस्त लहर में भी तीन सियासी सूरमाओं के बेटों ने अपने पिता की विरासत बचा ली। तीनों ही गैर भाजपा दल से चुनाव मैदान में उतरे थे और जीत हासिल कर भाजपा को क्लीन स्वीप करने से रोक दिया।
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चिल्लूपार और नौतनवां दोनों ही सीटों पर पूरे पूर्वांचल की निगाहें थी। जहां एक ओर पूर्व कबीना मंत्री और बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी अपने पिता की विरासत बचाने को बसपा से चुनाव लड़ रहे थे वहीं जेल में बंद पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमन मणि अपने पिता की साख बचाने की जद्दोजहद में थे। निर्दल मैदान में उतरे अमनमणि ने सिटिंग विधायक कौशल सिंह ऊर्फ मुन्ना सिंह को करीब 32 हजार के अंतर से पराजित कर अपने पिता की विरासत पर कब्जा कर लिया। उनकी जीत में दोनों बहनों की बड़ी भूमिका रही। चुनाव प्रचार के दौरान जेल में बंद अमन मणि के प्रचार का पूरा जिम्मा दोनों बहनों ने ही उठाया। जानकारों की मानें तो बहनों के चुनाव प्रचार में उतरने के बाद मतदाताओं का रुख बदल गया।

चिल्लूपार में विनय शंकर तिवारी को पूर्व मंत्री और भाजपा प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी को हराने में पसीना छूट गया। कांटे के मुकाबले में आखिरकार विनय शंकर का दांव काम आया और वह 3259 के वोटों से राजेश को शिकस्त देने में कामयाब हुए। इस सीट पर आखिरी क्षण तक रोमांच बना रहा। इसी तरह देवरिया के भाटपाररानी सीट से पूर्व मंत्री कामेश्वर उपाध्याय के बेटे डॉ. आशुतोष उपाध्याय सपा-कांग्रेस गठबंधन में सपा से चुनावी मैदान में थे। उन्हें भाजपा से लड़ रहे सांसद रवींद्र कुशवाहा के भाई जयनाथ कुशवाहा ने कड़ी टक्कर दी। हालांकि बाद में डॉ. आशुतोष की जीत का फासला 11 हजार तक पहुंच गया।
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इसके अलावा पूर्व मंत्री जमुना निषाद और विधायक राजमति निषाद के बेटे अमरेंद्र निषाद अपने पिता की विरासत बचाने में कामयाब नहीं हो सके। सपा से चुनाव लड़ रहे अमरेंद्र मुख्य लड़ाई से ही बाहर हो गए। उन्हें तीसरा स्थान हासिल हुआ। इसी सीट से पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी निर्दल चुनाव मैदान में थीं, लेकिन उन्हें करीब 31 हजार मतों से ही संतोष करना पड़ा।
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