ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने से मेडिकल कॉलेज का 10 बेडों का ट्रामा सेंटर बेकार पड़ा है। इसका निर्माण 2014 में हुआ था लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं की जा सकी। अब खामियाजा शहर और आसपास के जिलों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों या फिर हादसों में भी बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में छह बेडों का आईसीयू है। ज्यादातर बेड गंभीर रोगियों ने भरे रहते हैं। इसी वजह से वर्ष 2012 में 80 लाख रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर के 10 बेडों के दूसरे आईसीयू को बनाने का फैसला हुआ। इसका निर्माण कार्य 2014 में पूरा हो गया। लिक्विड ऑक्सीजन के लिए पाइप लाइन भी डाल दी गई लेकिन इसकी आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकी। इसके बगैर ट्रामा सेंटर का संचालन संभव नहीं है। ट्रामा सेंटर में हेड इंजरी या फिर एक्सीडेंट के गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि मई 2016 में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई लखनऊ की फर्म पुष्पा सेल्स एजेंसी को करनी थी। कुछ विवाद हुआ लेकिन मामला सुलझ गया। कंपनी ऑक्सीजन देने को तैयार भी हो गई। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा नहीं कर सका। इस कारण ट्रामा सेंटर शुरू करने का काम फंसा है।
नेपाल, बिहार के मरीजों को भी मिलेगी राहत
ट्रामा सेंटर के शुरू होने के बाद नेपाल और बिहार के मरीजों को भी राहत मिल सकती है। देवरिया, बस्ती, संतकबीर नगर, महाराजगंज, कुशीनगर, खलीलाबाद सहित कई जिलों के मरीज भी गोरखपुर आकर इलाज कराते हैं।
तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें अब दूर हो गई हैं। ट्रामा सेंटर मई तक शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने के बाद रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- डॉ. सतीश, प्रभारी मेंटीनेंस