नए खाद कारखाने में भले ही अब एफसीआई खाद नहीं तैयार करेगा मगर कारखाने की जमीन उसके लिए आगे भी सोना उगलने वाली साबित होगी। कारखाने की 993.810 एकड़ जमीन की जिला प्रशासन ने करीब 3100 करोड़ कीमत आंकी है। अब नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन (एनटीपीसी) और कोल इंडिया के संयुक्त उद्यम हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) वहां खाद बनाएगी और एफसीआई सिर्फ उन्हें किराये पर अपनी जमीन देगी। यह किराया भी करोड़ों में आंका जा रहा है। यानी चार दशक से अधिक समय पहले एफसीआई ने जिस जमीन को कभी मामूली रकम खर्च कर हासिल किया था उससे अब कारखाना न चलाते हुए भी करोड़ों की कमाई करेगा।
किराएनामे को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एफसीआई के जीएम चंद्र प्रताप ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि किराएनामे से जुड़ी फाइल मंत्रालय को भेज दी गई है। डीएम सर्किल रेट के मुताबिक एचयूआरएल को किराया देना पड़ेगा। बता दें कि कारखाने की कुल 993 एकड़ जमीन है जो छह गांवों की है। इनमें मानबेला, बेनी माधव नंबर-1, बेनी माधव नंबर-2, लच्छीपुर, जंगल नकहा नंबर-1 और जंगल नकहा नंबर दो शामिल है। इनमें 124 एकड़ जमीन पर एसएसबी काबिज है। एसएसबी ने करीब डेढ़ सौ एकड़ अभी और जमीन की मांग की है।
बताया जा रहा है कि पुराने खाद कारखाने का वजूद खत्म कर वहां जो नया कारखाना बनाया जाएगा वह काफी नई तकनीक वाला होगा। गैस से खाद तैयार होने की वजह से कम जगह और छोटी मशीनों से ज्यादा उत्पादन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस कारखाने की आधारशिला रखने के साथ ही यह भरोसा जताया कि तीन साल में यह कारखाना चालू हो जाएगा।