टीम के न पहुंचने के कारण प्रतियागिता न होने से सूना पड़ा मैदान।
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ओलंपियन अली सईद, प्रेम माया, प्रीति दुबे, डॉ. आरपी सिंह, दिवाकर राम जैसे दिग्गज हॉकी खिलाड़ी के घर में ही आज यह खेल उपेक्षित हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण बुधवार को माध्यमिक विद्यालयों की मंडलीय प्रतियोगिता में देखने को मिला। प्रतियोगिता में मेजबान गोरखपुर की टीम अंडर-14 और अंडर-17 आयु वर्ग में बिना खेले ही चैंपियन बन गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मंडल के देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज की टीम ने प्रतियोगिता में हिस्सा ही नहीं लिया।
रियो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है, जिसके बाद सरकार और खेल के दिग्गज हॉकी को लेकर अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। लेकिन असल में इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग है। माध्यमिक विद्यालयों में यह खेल पूरी तरह से खत्म होता जा रहा है। पिछले साल तक मंडलीय प्रतियोगिता में गोरखपुर मंडल की कम से कम दो टीमें जरूरी हिस्सा लेती थीं। लेकिन इस बार मेजबान गोरखपुर के अलावा कोई दूसरी टीम प्रतियोगिता में नहीं पहुंची। ऐसा तब है जब सरकार खेल के बढ़ावे के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। लेकिन ये सभी प्रयास अब बेकार होते नजर आ रहे हैं।
प्रतियोगिता के बारे में देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के संबंधित अधिकारी को सभी जानकारी दे दी गई थी। फोन पर भी उन्हें इस बारे में बताया गया था। बावजूद इसके कोई टीम प्रतियोगिता में हिस्सा लेने नहीं पहुंची।
- नियाज अहमद, क्रीड़ाध्यक्ष, एमएसआई इंटर कॉलेज