टेराकोटा शिल्पियों को मिलेगा विद्युत चालित कुम्हारी चाक
भटहट (गोरखपुर)। खादी ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने शनिवार को औरंगाबाद गांव में शिविर लगाकर हस्तशिल्प टेराकोटा के कारीगरों की समस्याएं सुनीं। साथ ही भरोसा दिलाया कि जल्द ही विद्युत चालित कुम्हारी चाक, मिट्टी गूथने वाली मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। टेराकोटा शिल्पियों को उन्नत भट्टी भी मिल सकती है। इसे लगाने में ढाई करोड़ रुपये खर्च होते हैं। उन्नत भट्टी की मदद से टेराकोट के बर्तनों को पकाया जाता है।
शिविर में प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश में माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है। इसके माध्यम से हस्तशिल्प को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार हस्तशिल्पियों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। इस मौके पर मौजूद माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि टेराकोटा और अन्य हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड का गठन किया गया है। इसके तहत कारीगरों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कारीगर लक्ष्मी प्रजापति ने प्रमुख सचिव को बताया कि वर्ष 1962 में गांव में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आए थे। कलाकृतियों को देखकर वह बहुत प्रसन्न हुए। बाद में उनको राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लक्ष्मी प्रजापति ने बताया कि उनके खानदान में 10 लोग राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। शिविर में क्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी गोरखपुर मंडल एनपी मौर्या, ग्राम प्रधान मांडवी देवी, कारीगर लक्ष्मी प्रजापति, पितांबर, विंध्याचल, जितेंद्र, आशा देवी, वीरेंद्र प्रसाद, एसके पांडेय आदि मौजूद रहे।
तीन करोड़ से बनेगा क्लस्टर
प्रमुख सचिव ने बताया कि जिन गांवों में स्वयं सहायता समूह से जुड़े 100 हस्तशिल्प कारीगर मिलेंगे, उन गांवों में खाली जमीन मिलने पर तीन करोड़ रुपये का अनुदान देकर एक क्लस्टर बनाया जाएगा। क्लस्टर में कारीगर अपनी कलाकृतियों का निर्माण और उन्हें सुरक्षित रख सकेंगे। इसका संचालन केंद्र सरकार की स्पूर्ति योजना के तहत होता है।
प्रमुख सचिव को बताईं समस्याएं
हाफिजनगर गांव में सार्वजनिक पोखरे से मिट्टी निकालकर मूर्ति तथा बर्तन बनाया करते थे, लेकिन प्रधान ने उसका पट्टा कर दिया। पट्टा निरस्त करने के लिए डीएम को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
राजन प्रजापति, टेराकोटा कारीगर, गुलरिहा
वर्ष 2010-11 में गांव में कलाकृतियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा 40 लाख की लागत से मकान के निर्माण के लिए ठेका दिया गया था, लेकिन ठेकेदार ने उसे आधा-अधूरा ही बनवाया है।
मोहन प्रजापति, औरंगाबाद