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पथरी के ऑपरेशन पर फोन से दिया तीन तलाक

Wed, 23 Aug 2017 01:51 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
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फरहत जहां उर्फ सोनी। - फोटो : Amar Ujala
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पहले दहेज के लिए पीटा। फिर ज्यादा पढ़ी-लिखी होने पर मार पड़ने लगी। इस पर भी 25 साल की फरहत जहां (सोनी) ने ससुराल न छोड़ा तो मायके वालों को बेइज्जत करना शुरू कर दिया। सब सहकर भी सोनी शौहर शफीक खान पर कुर्बान होने को तैयार थी। यकीन था कि मोहब्बत और खिदमत से हालात बदल जाएंगे। इसी बीच एक्सीडेंट से इकलौते भांजे के जान पर बन आई तो सोनी उसे देखने मायके आई। एक दिन पेट में दर्द उठा तो पथरी और ट्यूमर का पता चला। ऑपरेशन हुआ तो लालची शौहर और ससुरालियों को बहाना मिल गया। अभी टांके भी नहीं कटे थे कि शौहर की कॉल आई। फोन पर शफीक तलाक-तलाक-तलाक बोल गया।
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इतना बताते ही सोनी की आंखों से सैलाब छूट उठा। सिसकियां में आवाज घुटी तो मां रौशन जहां और बड़ी बहन गुलशन सहारा देने लगीं। गुलशन सोनी के आंसू पोंछ रही थीं तो मां उस मनहूस घड़ी को बयां करने लगीं। बोलीं, बेसुध होकर धड़ाम से गिरने से पहले बस इतना ही तो बोल पाई थी सोनी ‘भला ऐसे कैसे तलाक दे सकते हो?’ अब बूढ़ी मां की आंखों से भी आंसू झर रहे थे। कहा, ढाई साल पहले 24 जनवरी को सोनी का निकाह लखनऊ के मड़ियाव निवासी सलीम खान के बेटे शफीक उर्फ सोनू से किया था। रिटायर्ड शिक्षक रौशन जहां ने अपनी कुव्वत भर दहेज भी दिया। पहला झटका तब लगा जब रिसेप्शन के एक दिन बाद सोनी ने सुबकते हुए शौहर का पहले भी निकाह होने की जानकारी दी थी। इसी बीच सोनी बोली, अगर पहले ये पता लगा होता तो हरगिज निकाह कबूल न करती। धोखे के बाद भी मां ने समझाया तो गृहस्थी संवारने की कोशिश में जुट गई। मेरी कोशिशें काम न आईं। कभी दहेज के नाम पर तो कभी ज्यादा पढ़ी होने की बात पर पीटा जाने लगा। बचपन में अब्बू का इंतकाल हो गया। खुदा ने कोई भाई न दिया। अगर अब्बू होते या भाई होता तो ससुराल वाले यूं मनमानी न कर पाते।

नरगिस नहीं लड़ी पर मैं तो लड़ूंगी
ससुराल में पता चला कि शौहर ने मुझसे पहले लखनऊ की नरगिस से निकाह किया था। महज छह दिन में उसे तलाक देकर घर से निकाल दिया था। काश नरगिस ने उसके जुल्म का विरोध किया होता तो मेरी जिंदगी बर्बाद न हुई होती। यह कहते हुए सोनी बोली कि कुछ भी हो जाए, मैं तो लडृंगी ताकि फिर कोई सोनी और उसका परिवार बर्बाद न हो। ट्यूशन पढ़ाकर और सिलाई कर हम दोनों बहने घर का खर्च चलाती हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दी नई हिम्मत
सोनी ने बताया कि 26 अगस्त को तलाक के खिलाफ दीवानी कचहरी में तारीख पड़ी है। चार-पांच तारीखों में खुद को फंसता देखकर भांजे और हम तीनों के खिलाफ ससुरालियों ने मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया। अभी शनिवार को लखनऊ कोर्ट का सम्मन घर आया है। सास घर पर आकर बोल गई थी कि बेटे का पांच निकाह कराऊंगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नई हिम्मत दी है। कोई और बर्बाद न हो, इसलिए सोनू को सजा दिलाना ही अब जिंदगी का मकसद है।

मुस्लिम लड़कियों की जिंदगी महफूज होगी
सुप्रीम कोर्ट ने काफी अच्छा कदम उठाया है। इससे मुस्लिम लड़कियों की जिंदगी महफूज होगी। निकाह के लिए अगर दो गवाह की जरूरत होती है तो तलाक बिना गवाह के कैसे सही है? अगर अलग होना जरूरी है तो संविधान के मुताबिक न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही तलाक की व्यवस्था अपनाई जाए।
- मीना खातून, मियां बाजार

काबिले तारीफ फैसला
फोन पर न तो निकाह जायज है और न ही तलाक। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के खिलाफ जो फैसला सुनाया है वह काबिले तारीफ है। इस्लाम में एक साथ तीन तलाक को गलत बताया गया है। कुछ जाहिल किस्म के लोग तीन तलाक देकर मासूम लड़कियों की जिंदगी तबाह कर देते हैं।
- सलमा नवाब, पूरब फाटक मियां बाजार

ग्रेसफुली स्वीकार करना चाहिए
फैसले को ग्रेसफुली स्वीकार करना चाहिए। तीन तलाक सामाजिक बुराई है। खलीफा हजरत उमर के जमाने में तो एक साथ तीन तलाक देने वालों को कोड़े लगाए जाते थे। तीन तलाक को इस्लाम में तलाक-ए-बिदई यानी कि बेहद खराब बताया गया है। यह सराहनीय फैसला है।
- डॉ. अजीज अहमद, ऊंचवा

स्वागत योग्य है कोर्ट का फैसला
मुसलमानों में कुरान को लेकर अज्ञानता है। एक साथ तीन तलाक का कुरान में कहीं जिक्र नहीं है। तीन तलाक गलत परंपरा है। कुछ मुल्ला-मौलवियों ने अपने लाभ के लिए इस तरह की गलत परंपरा डाल दी। इस्लाम में हर तलाक के बाद सुधरने का मौका दिया गया है। फैसला स्वागत योग्य है।
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- डॉ. खालिद अब्बासी, अध्यक्ष नर्सिंग होम संघ
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