शरीयत में तलाक की पूरी प्रक्रिया बताई गई है। तीन तलाक के बीच वक्त दिया गया है। तलाक से सिर्फ शौहर और बीवी अलग नहीं होते, बल्कि बच्चों का भविष्य भी जुड़ा होता है। ऐसे में तीन तलाक के बीच दिया गया वक्त उस गलती को सुधारने का एक मौका है। फोन, मैसेज और व्हाट्सएप पर निकाह नहीं हो सकता तो इसके जरिए तलाक कहां जायज है। मऊ से आईं मुस्लिम धर्मगुरु महजबीं अख्तरी ने इन बातों के साथ ऑनलाइन दिए जा रहे तलाक को गलत ठहराया।
वह शहर में हजरत मुबारक खां शहीद की दरगाह पर रविवार को मुस्लिम महिलाओं के राज्य स्तरीय सम्मेलन में ‘बज़्म-ए-ख्वातीन बनाम इस्लाह-ए-मआशरा कांफ्रेंस’ में बोल रही थीं। कांफ्रेंस की मुख्य वक्ता महजबीं अख्तरी ने तीन तलाक पर हो रही सियासत को लेकर सरकार को भी घेरा। बोलीं, सरकार की दिलचस्पी मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाने में नहीं बल्कि शरई कानून में छेड़छाड़ करने में हैं। इसे मुस्लिम समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।
फरहत जहां ने भी तीन तलाक के बीच तय वक्त का पालन करने की पैरवी की। मऊ से आईं ताबिदा खानम ने तलाक की प्रक्रिया समझाते हुए रजई, एहसन और बिदी का जिक्र किया। कहा कि एक तलाक रजई है तो तीन तलाक बिदी। शरीयत भी एक साथ तीन तलाक का हुक्म नहीं देता। अति विशिष्ट वक्ता घोषी मऊ से आईं इस्लामिक स्कॉलर साफिया खातून ने मुसलमानों की शिक्षा पर जोर दिया। गोरखपुर की इस्लामिक विद्वान नूर अफ्शां ने तलाक को सियासी रंग देने का विरोध किया। कहा कि जो लोग मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकार देने की बात कर रहे हैं वे उन बेवाओं को इंसाफ दिलाएं, जिनके पति गुजरात के दंगों में मारे गए हैं।
इससे पहले सम्मेलन का आगाज तिलावते कलाम पाक से शमीना जबीन ने किया। अंत में सलातो सलाम पढ़ कौम-ओ-मिल्लत और मुल्क की तरक्की की दुआ मांगी गई। अध्यक्षता गोरखपुर की आलिमा शबाना खातून शम्सी ने की। नात शरीफ सुम्बुल फैजानी, कनीज फातिमा, उम्मे कुलसुम, नौशीन बानो, नाजिश फातिमा, गुल अफ्शां फातिमा ने पेश किया।
संचालन मऊ की आलिमा फरहत जहां ने किया। इस दौरान तरन्नुम खानम, शमीमा खातून, सूफिया खातून, सैयदुन्निशा, फरीदा खातून, तबस्सुम खातून, हसरतुन निशा, मुजीबुन निशा, रुबीना खातून, मदीना खातून आदि मौजूद थीं।