भइया जी का दाल भात परिवार की ओर से बैंक रोड के परिणय स्थली में चल रही श्रीमद्भागवत की कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा व्यास स्वामी अखंडानंद ने मन, वासना और कर्म के विषय पर प्रकाश डाला। कथा सुनकर श्रद्घालु भावविभोर हो गए।
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कथा व्यास ने कहा कि मां काली शक्ति साधना केंद्र की दिव्य अवधारणा हैं। कहा कि शरीर नश्वर है। विभिन्न रूपों में इसे भागवत भजन के कार्य में ही लगाना उत्तम प्रवृत्ति है। भगवान की लीला जीव के शरीर माध्यम से ही संभव है। ऐसे सत्य स्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं।
श्रीमद्भागवत का अर्थ है भगवान में रत हो जाना। व्यास पीठ ने गोपी लीला का भी वर्णन किया। उद्धव का गोपी संवाद, आचरण को निष्काम भाव से प्रकट करता है। गुरु के पास और मंदिर में कभी भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देते, न ही उनका जन्म होता है और न तो मरते हैं। वह तो सर्वव्यापी हैं। कथा सुनने से मन की व्यथा दूर हो जाती है। यदि हृदय से कथा श्रवण करेंगे तो आपको स्वत: भगवान का साक्षात अनुभव मिलेगा।
आरती में भईया जी का दाल भात की परिकल्पना पर चर्चा की गई। भूख मुक्ति के लिए एक मुट्ठी अनाज मांगा गया व भूख मुक्त समाज के लिए आह्वान किया गया। प्रयागराज से आये शत्रुघ्न ब्रह्मचारी जी, सुधा विश्वबिंदु, रंजीत ओझा, सोनू निगम, एमपी सिंह, राजीव सिद्धार्थ, महानंद यादव ने आरती किया।
अंत मेें सभी के भोजन व प्रसाद की व्यवस्था की गई। संचालन आशीष रूंगटा ने किया। वहीं अतिथियों का गुड्डू मिश्र व दुर्गा प्रसाद राय ने अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। इस अवसर पर पारूल सिंह, यशवंत सिंह, सुबोध सिंह, राणा राहुल सिंह, अजय सिंह, बाबा मिश्र, संगीता, योगेंद्र नाथ, वासुकीनाथ, अतुल मिश्रा, रमेश चक्रवर्ती, रमेश चंद्र गुप्ता, भानू प्रकाश, पंडित रुक्मिणी नारायण, शंकर गिरि, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के अर्जुनानंद, राजन तिवारी, सुरेश चंद्र जायसवाल, यशवंत सिंह, राधा रमण गुप्ता, दुर्गा प्रसाद कसौधन सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
आगामी कार्यक्रम : कथा में रविवार को भगवान अवधूत राम के परम शिष्य अलखराम जी भी मुंबई से आएंगे। वहीं शाम 6.30 बजे कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा।