पूर्वांचल का जिम कॉर्बेट माने जाने वाले सोहगीबरवां में एक साल पहले हुई गणना के मुताबिक तेदुओं की कुल संख्या 47 बताई जाती है। जिसमें 16 नर, 19 मादा तो 12 शावक हैं। बीते कुछ साल से तेदुओं की हो रही मौत से वन्य जीव प्रेमियों के मन में तरह-तरह की भावना उपज रही है।
कुछ लोगों इस घटना को शिकारियों के शिकार, तो कुछ लोग सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के विभिन्न नालो में बहने वाला दूषित जल कारण बता रहे हैं। शंकाओं के बीच वन विभाग जानवरों की मौत पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहा। जबकि मृत तेदुओं की मौत संदेहास्पद है।
सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में अगर मृत पाए गए तेदुओं की संख्या पर नजर डाले तो दस सालों में आठ तेदुओं की मौत बताई जाती है, जिसमें से चार तेदुओं की मौत तो अकेले वर्ष 2015 में हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब आठ साल पहले डोमा जंगल में एक तेदुएं की मौत, मधवलियां गोसदन में तेंदुए की संदिग्ध परिस्थिति में मौत, 24 अप्रैल 2015 में पकड़ी जंगल में तेंदुए की संदेहास्पद मौत, दस जून 2015 को लक्ष्मीपुर रेंज में तेदुएं की मौत, 29 नवंबर 2015 को मधवलिया रेंज के दुधई बीट में तेंदुए की मौत, नौ दिसंबर 2015 को चौक रेंज के नक्शा बक्शा गांव में तेंदुए की मौत, 22 मार्च 2018 को चौक रेंज के नाथनगर बीट में तेंदुए की मौत तथा 22 दिसंबर 2018 को उत्तरी चौक रेंज में तेंदुए की मौत बताई जाती है। 28 फरवरी 2019 की रात उत्तरी रेंज के गुलरिया बीट में तेंदुए की मौत हो गई। इधर, 21 मार्च 2019 को गोरखपुर वन प्रभाग के नटवा जंगल के धवई बीट में समय माता स्थान के सामने चिलुआ नाले में तेंदुआ मृत मिला।