छात्रसंघ चुनाव के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तारीख तय कर दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 16 सितंबर को चुनाव कराने का निर्णय लिया है। हालांकि इस पर अंतिम मुहर प्रशासन की सहमति के बाद ही लग पाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन को पत्र भेज दिया गया है।
दरअसल दस सालों से लगे प्रतिबंध के हटने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव इस सत्र में हर हाल में संपन्न कराने की मंशा बना ली है। शनिवार को प्रो. संजय बैजल के चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद शाम को कुलपति प्रो. अशोक कुमार की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई। इसमें सर्व सम्मति से 16 सितंबर को छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्तावित तिथि पर प्रशासनिक सहमति लेने के लिए पहले जिला प्रशासन को मौखिक सूचना दी गई। बाद में फैक्स भेजकर भी लिखित सहमति मांगी गई। चुनाव अधिकारी प्रो. बैजल ने बताया कि जिला प्रशासन की हरी झंडी मिलते ही चुनाव की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी।
यूनिवर्सिटी में लागू हुई आचार संहिता
चुनाव की तारीख का प्रस्ताव होने के साथ ही चुनाव अधिकारी प्रो. संजय बैजल ने आचार संहिता लागू कर दी है। उन्होंने बताया कि आचार संहिता के दौरान लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। इसका उल्लंघन करने वाले पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की भी हो सकती है। उधर, परिसर में बिना प्रवेश पत्र प्रवेश पर भी सख्ती बरती जाएगी। चीफ प्रॉक्टर प्रो. सतीश चंद्र पांडेय ने बताया कि जिन विद्यार्थियों का प्रवेश पत्र नहीं बना है, उन्हें प्रवेश शुल्क की रसीद दिखानी होगी। इसके अलावा परिसर में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।
प्रत्याशियों के लिए आचार संहिता का प्रारूप
- चुनाव प्रचार एवं मतदान के समय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आम चुनावों के लिए घोषित आदर्श मानकों का यथासंभव पालन यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में सख्ती से कराया जाएगा।
- चुनाव प्रचार एवं प्रसार सामग्री में किसी राजनीतिक दल की प्रतिबद्धता एवं संबद्धता व्यक्त नहीं की जा सकेगी।
- प्रचार के लिए यूनिवर्सिटी के शैक्षिक व आवासीय परिसर और यूनिवर्सिटी के बाहर किसी भवन, परिसर, सार्वजनिक स्थल व राजकीय भवनों की दीवारों पर पेटिंग आदि पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
- यूनिवर्सिटी, किसी एजेंसी या व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा लगाए गए होर्डिंग को न तो रंगा जाएगा और न ही उस पर वोट हासिल करने का आग्रह किया जाएगा।
- कक्षाओं के दौरान चुनाव प्रचार नहीं होगा। प्रत्याशी एवं उसके समर्थक कक्षा में जाकर प्रचार नहीं करेंगे और न ही भवन में नारे लगाकर कक्षाओं की शांति भंग करेंगे। प्रत्याशी एवं उसके समर्थक कक्षाओं के बाद एवं मध्यावकाश के समय ही प्रचार कर सकेंगे।
- यूनिवर्सिटी कैंपस एवं उसके बाहर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा।
- चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रत्याशी एक बार ही जुलूस निकाल सकेगा। इसकी अनुमति चीफ प्रॉक्टर या चुनाव अधिकारी से लेनी होगी।
- जुलूस यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर नहीं निकाला जाएगा।
- चीफ प्रॉक्टर की अनुमति से ही प्रत्याशी यूनिवर्सिटी कैंपस में कक्षाओं के बाद मीटिंग कर सकेंगे। इसमें बाहरी व्यक्तियों को शामिल करने की अनुमति नहीं होगी।
लिंगदोह कमेटी के अनुसार प्रत्याशियों के लिए मानक
- प्रत्याशी के लिए विश्वविद्यालय का नियमित छात्र होना जरूरी, पत्राचार अथवा निजी छात्र चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं।
- प्रत्याशी के लिए कक्षाओं में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य।
- स्नातक स्तर के प्रत्याशी के लिए आयु सीमा 22 वर्ष, परास्नातक स्तर के लिए 25 वर्ष तथा शोध छात्र के लिए 28 वर्ष।
- चुनाव में अधिकतम एक प्रत्याशी पांच हजार रुपया तक ही खर्च कर सकेगा।
- खर्च या किसी भी नियम के उल्लंघन पर चुनाव निरस्त हो जाएगा।
- आपराधिक रिकार्ड, मुकदमा, सजा या अनुशासनात्मक कार्रवाई वाला विद्यार्थी प्रत्याशी नहीं बन सकेगा।