वातावरण और जनजीवन की बड़ी मुसीबत साबित हो रही पॉलीथिन-प्लास्टिक से देश की बड़ी जरूरत पूरी करने की कोशिश के लिए 12वीं के छात्र शिवम पांडेय ने कदम बढ़ाया है। घर की छत के एक हिस्से को प्रयोगशाला बनाकर ऐसी कोशिश में जुटे शिवम का दावा है कि पॉलीथिन-प्लास्टिक, वेस्ट रबर को कुछ खास तरह के केमिकल के साथ निश्चित ताप और अवधि पर गर्म कर आसवन (डिस्टिलेशन) विधि से कच्चा तेल हासिल किया जा सकता है।
राप्ती नगर निवासी कृषि विभाग के कर्मचारी गिरिजेश पांडेय के बेटे शिवम की मानें तो प्रयोग के क्रम में वह 18 से 20 रुपये के औसत खर्च में 700 से 800 मिलीलीटर कच्चा तेल हासिल करने में कामयाब हो चुके हैं। इस काम के लिए करीब चार घंटे तक 70 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान मेंटेन रखा था। लिटिल फ्लावर स्कूल में पढ़ रहे शिवम बताते हैं कि 10वीं में केमिस्ट्री की पढ़ाई के दौरान समझ आया कि हाइड्रोकार्बन को तोड़ा जा सकता है। इसी के बाद प्लास्टिक और पॉलीथिन को डीकंपोज करने का ख्याल मन में आया। इसे कुछ रसायनों के मिश्रण के साथ ज्यादा गर्म कर आसवन विधि से द्रव एकत्रित करने पर हासिल हुआ एक्सट्रेट कच्चा तेल निकला। इसे रिफाइन कर पेट्रोल हासिल किया जा सकता है। इस काम में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को गोपनीय बताते हुए शिवम ने कहा कि अपना फॉर्मूला पेटेंट कराने के लिए उन्होंने आवेदन किया है। शिवम का लक्ष्य कम्प्यूटर साइंस और केमेस्ट्री में शोध करने का है।
ईंधन योग्य गैसें भी मिलेंगी
शिवम का कहना है कि प्लास्टिक और पॉलीथिन को गर्म करते समय मिलाए जाने वाले रसायनों के अनुपात और तापमान में मामूली बदलाव कर पेट्रोल के अलावा डीजल और केरोसीन भी प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में उत्सर्जित होने वाली गैसें इस प्रयोग में ईंधन का काम कर सकती हैं क्योंकि इससे मीथेन, प्रोपेन आदि गैसें उत्सर्जित होती हैं।