जाम के हर प्वाइंट पर पुलिस। रोडवेज बसों के मनमाने रूट पर भी रोक। स्कूलों की छुट्टी के समय कई रूटों पर टेंपो की भी मनाही। पैडलेगंज से कमिश्नरी, कचहरी जाने वालों को जब छात्रसंघ चौराहे से आगे जाम दिखा तो वह यूनिवर्सिटी रोड पर मुड़ गए, मगर जाम में फंस गए। हरिओम नगर से जब अंबेडकर चौक तक जाम लग गया तो कुछ लोगों ने डीवीएनपीजी कालेज होते हुए गोलघर की राह पकड़ना मुनासिब समझा, मगर वहां भी जाम लगा रहा। इसी तरह बक्शीपुर से कलेक्ट्रेट कचहरी जाने वालों को जब अग्रसेन तिराहे से टाउन हाल तक ठसाठस गाड़ियों का काफिला दिखा तोे कई ने विजय चौराहे की तरफ से गोलघर होते हुए मंजिल तक पहुंचने का निर्णय किया मगर सिनेमा रोड पर फंस गए।
यह तो बानगी है। सड़क, चौराहे ही नहीं, शहर की कई गलियाें में भी सुबह 11 बजे से लेकर तीन बजे तक सोमवारी जाम दिखाई पड़ा। आईजी, डीआईजी और एसएसपी की सख्ती के बाद सड़कों पर पुलिस के सक्रिय होने के बाद भी विभिन्न विभागों-संगठनों के सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने से पूरी ट्रैफिक व्यवस्था ही ध्वस्त हो गई। अमूमन खाली रहने वाली यूनिवर्सिटी सड़क पर भी लंबा जाम लगा रहा। एक तरफ यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में दावेदारी करने वालों के समर्थकों का जुलूस तो एक तरफ लेखपालों का। अभी ये सड़कों पर थे ही कि पंचायती संगठन के लोग भी मोटरसाइकिल जुलूस के साथ निकल पड़े। नतीजतन घंटों कई रास्ते पूरी तरह से चोक कर गए और आम आदमी हांफता रहा। कहीं स्कूली बस में बच्चे बिलबिलाते नजर आए तो कहीं मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस आगे बढ़ने को जद्दोजहद करती रही।