सहजनवां विधानसभा सीट से भाजपा के बागी अश्विनी त्रिपाठी और सपा से बागी हुए पूर्व मंत्री के बेटे मनोज यादव समेत छह उम्मीदवारों ने शनिवार को विभिन्न सीटों से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इनमें पिपराइच से चुनाव लड़ रहीं पूर्व मंत्री जितेंद्र उर्फ पप्पू जायसवाल की पत्नी अनीता जायसवाल के बेटे विशाल और बसपा उम्मीदवार आफताब आलम के भाई माहताब आलम भी शामिल हैं। चिल्लूपार से निर्दल पर्चा दाखिल करने वाले आलोक कुमार गुप्ता ने भी नाम वापस ले लिया जबकि पत्नी पूनम चुनावी मैदान में हैं। खजनी से निर्दल नामांकन करने वाली गीता देवी भी मैदान से हट गई हैं।
नाराज अश्विनी को मनाने के लिए शुक्रवार देर रात तक महंत आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लगे थे। शनिवार को नामांकन पत्र वापस लेने गए अश्विनी के साथ भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी भी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इस मौके पर अश्विनी ने कहा कि महंत के सम्मान की वजह से उन्होंने पर्चा वापस लिया है। वह भाजपा में थे, हैं और आखिरी वक्त तक भाजपा में ही रहेंगे। पार्टी अध्यक्ष ने उनसे मुलाकात की और आश्वस्त किया कि पार्टी उनकी निष्ठा और हितों का पूरा ध्यान रखेगी। इसी तरह मनोज यादव ने कहा कि उनके परिवार और सपा का रिश्ता 40 साल का है। मुख्यमंत्री की बात काट नहीं पाए, लिहाजा पर्चा वापस ले लिया। अब जिले की नौ सीटों के लिए चुनावी मैदान में 127 प्रत्याशी ही रह गए हैं, जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में 221 प्रत्याशी मैदान में थे। इस बार कुल 166 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। 16 फरवरी को हुई नामांकन पत्रों की जांच में 33 पर्चे खारिज हो गए थे।
तीन विधानसभा सीटों में ही लगेंगी दो ईवीएम
नाम वापसी पूरी होने के साथ ही सभी विधानसभा सीटों में प्रत्याशियों की संख्या भी अब स्पष्ट हो गई है। शहर में सर्वाधिक 23 तो बांसगांव में सबसे कम आठ प्रत्याशी मौदान में हैं। अब सिर्फ तीन विधानसभा सीटों में ही दो-दो ईवीएम लगेंगी। इनमें पिपराइच, शहर और चौरीचौरा विधानसभा सीट शामिल हैं। प्रत्याशियों की संख्या 15 से अधिक होने पर संबंधित विधानसभा सीट में दो-दो ईवीएम लगानी पड़ती हैं। इसी तरह कैंपियरगंज में अब 14, ग्रामीण में 12, सहजनवां में 12, खजनी में 10, बांसगांव में आठ और चिल्लूपार में नौ प्रत्याशी मौदान में हैं।
खजनी में कमजोर पड़ गई गठबंधन की डोर
सपा-कांग्रेस के गठबंधन की डोर खजनी विधानसभा में कमजोर पड़ गई है। इस सीट से कांग्रेस के कमांडो कमल किशोर और सपा की रूपावती आमने-सामने हैं। शहर सीट से सपा के राहुल गुप्ता की प्रत्याशिता पार्टी की ओर से निरस्त होने के बाद सपाइयों को पूरी उम्मीद थी कि कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर कमांडो कमल किशोर पर्चा वापस ले लेंगे। शनिवार को जब उन्होंने नामांकन वापस नहीं लिया तो सपाइयों को तगड़ा झटका लगा। सपा के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव का कहना है कि उनकी पार्टी ने ईमानदारी दिखाते हुए शहर सीट से राहुल की प्रत्याशिता वापस करा दी। कांग्रेस नेताओं को भी ईमानदारी दिखाते हुए खजनी से अपना प्रत्याशी हटा लेना चाहिए था, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। कांग्रेसियों ने भले ही ईमानदारी नहीं दिखाई मगर उन्हें पूरा विश्वास है कि जनता ईमानदारी दिखाएगी। उन्होंने कहा कि गोरखपुर की खजनी सीट ही नहीं बल्कि सूबे की कई सीटों पर कांग्रेसियों ने गठबंधन का ख्याल नहीं रखा। वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. सैय्यद जमाल का कहना है कि दो दिन में इस मामले में फैसला हो जाएगा। भले ही पर्चा वापस लेने की मियाद खत्म हो गई है, मगर पार्टी कमल किशोर का पर्चा वापस लेने का फैसला करती है तो मीडिया और अन्य माध्यमों से हम इसकी घोषणा करते हुए सपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने की अपील करेंगे।
कोई हल लेकर क्षेत्र में भागा तो कोई मोटरसाइकिल
कलेक्ट्रेट में बने नामांकन कक्ष में शनिवार की देर शाम तक चुनाव चिह्न के लिए शोर मचता रहा। पसंद के चुनाव चिह्न के लिए प्रत्याशियों में होड़ मची रही। कुछ तो चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया समझाने के बाद भी आरओ से बहस करते रहे और जब सफलता नहीं मिली तो प्रशासन पर आरोप लगाने से भी गुरेज नहीं किया। वहीं चुनाव चिह्न मिलते ही तमाम प्रत्याशी सीधे अपने-अपने क्षेत्रों के लिए निकल पड़े। संबंधित विधानसभा क्षेत्र में पहुंचने के बाद पहले प्रचार में लगे अपने एजेंट और समर्थकों को चुनाव चिह्न की जानकारी दी और खुद भी देर रात तक वोटरों को अपना निशान बताकर वोट मांगते रहे।
दरअसल, राजनीतिक पार्टियों को छोड़कर निर्दल प्रत्याशियों को नाम के अल्फाबेट के मुताबिक चुनाव चिह्न चुनने की छूट दी गई थी। आवंटन की इस प्रक्रिया के बाद भी कोई मोटरसाइकिल के लिए आरओ के सामने चिरौरी करता रहा तो कोई खटिया तो कोई सिलाई मशीन। पिपराइच से निर्दल चुनाव लड़ रहीं पूर्व मंत्री जितेंद्र उर्फ पप्पू जायसवाल की पत्नी अनीता जायसवाल को क प-प्लेट तो ग्रामीण विधान सभा सीट से संजय निषाद को खाने से भरी थाली मिली तो उसी सीट से चुनाव लड़ रहीं उनकी पत्नी मालती देवी को चुनाव चिह्न के तौर पर शेविंग मशीन का निशान आवंटित हुआ।