गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर चिकित्सा विभाग के मेडिको लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) की व्यवस्था से खासे नाराज हैं। शुक्रवार को गोरखपुर जिला चिकित्सालय और नेबुआ नौरंगिया सीएचसी से बिना एमएलसी के इलाज को पहुंचे दो मरीजों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताते हुए सर्टिफिकेट बनाने से इनकार कर दिया और इसे लेकर एसआईसी से शिकायत की। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे इसकी लिखित शिकायत एडी हेल्थ और सीएमओ से करेंगे।
पूर्व प्राचार्य प्रो. केपी कुशवाहा से भी इमरजेंसी मेडिकल अफसरों ने अपना विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र भी लिखा था। लेकिन इसका असर कुछ दिन ही रहा, व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर आ गई। इमरजेंसी मेडिकल अफसरों की नाराजगी शुक्रवार को तब फिर सामने आ गई जब बृहस्पतिवार को विन्ध्यवासिनी नगर में गोली का शिकार हुए आलोक श्रीवास्तव को जिला अस्पताल ने बिना एमएलसी के मेडिकल कॉलेज भेज दिया। इसे लेकर अभी कवायद चल ही रही थी कि नेबुआ नौरंगिया सीएचसी से बिना मेडिको लीगल सर्टिफिकेट के रेफर होकर आए दुर्घटना में घायल 12 वर्ष के अफजल की कॉलेज में इलाज के दौरान ही मौत हो गई।
एक साथ दो मामले देख मौके पर तैनात इमरजेंसी डॉक्टर ने दोनों ही मामलों में एमएलसी बनाने से इनकार कर दिया। अफजल के परिजनों ने भी यह लिखवाकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उसे सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, बाद में कहासुनी के बाद आलोक श्रीवास्तव का सर्टिफिकेट देर शाम बना दिया गया। लेकिन इसे लेकर इमरजेंसी में पूरे दिन कवायद चलती रही।
मेडिको लीगल को लेकर जिला चिकित्सालय, सीएचसी और पीएचसी के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार से कॉलेज प्रशासन को आए दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर बहुत जल्द एडी हेल्थ और सीएमओ को चिट्टी लिखी जाएगी और तीनों स्थानों के डॉक्टरों को इसके लिए सख्ती बरतने के लिये कहा जाएगा।
प्रो. राम कुमार, एसआईसी, नेहरू चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर