दुकानदार ग्राहको को खींचने के लिए कैशलेस खरीदारी का ऑप्शन देने लगे हैं।
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भले ही महाराष्ट्र के ठाणे जिले का धसई गांव के लोगों के अलावा दुकानदारों द्वारा पीटीएम, स्वैप मशीन का इस्तेमाल कर कैशलेस सोसाइटी बनने वाला देश का पहला गांव बन गया हो, लेकिन गोरखपुर के लोगों में लेनदेन के इस नई तकनीक को अपनाने में काफी हिचक है। एक तो लेनदेन की इस नई तकनीक को अपनाने वाले दुकानदारों की संख्या बहुत कम है, वहीं ग्राहक भी नकदी में ही खरीदारी करने को तवज्जो देते हैं।
नोटबंदी के बाद उपजे हालात में छोटे दुकानदारों ने कारोबार को चलाने के लिए नई तकनीकों के साथ चलने की कोशिश भी शुरू की, लेकिन बहुत कम लोगों द्वारा नई तकनीक अपनाने की वजह से दुकानदारों का व्यवसाय काफी कम हो पा रहा है। ऐसे में चाहे पान वाले हों, या धोबी या फिर ट्रेवल एजेंट सबका धंधा मंदा हो गया है। हालांकि स्वैप मशीन रखने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। शहर के विभिन्न बैंकों से स्वैप मशीन खरीदने वालों की संख्या हजार के पार पहुंच गई है, लेकिन छोटे से बड़े कारोबार करने वालों की संख्या को देखते हुए यह संख्या काफी कम है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में नगर निगम की ही 2300 से ज्यादा दुकानें हैं, जबकि सभी दुकानों की संख्या 10 हजार से ज्यादा बताई जा रही हैं।
नोटबंदी के कुछ ही दिन के बाद स्वैप मशीन ले लिया, लेकिन तकरीबन 25 दिन से ज्यादा होने को हैं, लेकिन मात्र 10 लोगों ने इससे कीमत अदा की। अधिकांश लोग अब भी नकदी ही दे रहे हैं।
आदित्य सिंह, ट्रैवल एजेंट, रुस्तमपुर
हमने पीटीएम ले रखा है। दुकान पर इसकी सूचना भी लगाई है, लेकिन अब तक किसी भी खरीदार ने इससे खरीदारी नहीं की है। संभवत: अभी इसको लेकर ग्राहकों में झिझक है। आदत बदलने में वक्त को लगेगा।
दिलीप कुमार नायक, दुकानदार