श्रावणी पूर्णिमा पर कई स्थानों पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। भारतीय विद्वत महासभा की ओर से गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर पर श्रावणी उपाकर्म मनाया गया। विद्वानों, पुरोहितों और यज्ञोपवीत पहनने वालों ने सामूहिक रूप से महासंकल्प के साथ वेदमंत्रों का पाठ किया।
यह पाठ महासभा के महामंत्री पं. बृजेश पांडेय और पं. राजेंद्र शुक्ल के आचार्यत्व में संपन्न हुआ। उपाकर्म के क्रम में सबसे पहले आचमन करने के बाद शरीर शुद्धि के लिए पंचगण्य प्राशन संस्कार किया गया। उसके बाद हेमाद्रि संकल्प के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। भस्म, मृत्तिका और गोमय से स्नान करने के बाद चिचिहिड़ा, दूर्बा, कुश से मार्जन कर स्नान किया गया और फिर गायत्री मंत्र का जप व रुद्री का पाठ किया गया। इसके बाद विद्वतजनों ने सप्तऋषियों को चंदन, अक्षत, फूल, धूप, नैवेद्य, फल, मीठे, वस्त्र व दक्षिणा अर्पण किया और यज्ञोपवीत का पूजन कर शरीर में धारण किया। इस दौरान कुलदीप पांडेय, पं. रमेश पांडेय, पं. राजेश मिश्र, पं. देवेंद्र प्रताप मिश्र, अश्वनी कुमार मिश्र, पं. मेघराज मिश्र आदि मौजूद रहे।
उधर भारतीय विद्वत समिति और गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ ने भी भीम सरोवर में श्रावणी उपाकर्म संपन्न कराया। अध्यक्षता संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य रामानुज त्रिपाठी ने की। वैदिक कर्मकांड को आचार्य दयाशंकर मिश्र याज्ञिक और वेदाचार्य रंगनाथ त्रिपाठी व डॉ. प्रवीण कुमार पांडेय ने संपन्न कराया। आचार्य रामनारायण त्रिपाठी, डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री, डॉ. संकर्षण त्रिपाठी, वेंकटेश त्रिपाठी, अश्विनी त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
गीता प्रेस ने किया श्रावणी कर्म
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गीता प्रेस ने श्रावणी कर्म यानी यज्ञोपवीत पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया। प्रेस से जुड़े लोग पहले सुबह 7:30 बजे राप्ती तट पहुंचे और स्नान, हेमाद्रि संकल्प और तर्पण आदि किया। फिर दोपहर 11:30 बजे प्रेस के लीला चित्र मंदिर पहुंचकर बह्म यज्ञ, सप्तर्षि व यज्ञोपवीत पूजन में हिस्सा लिया। इस अवसर पर बैजनाथ अग्रवाल, देवी दयाल अग्रवाल, परमेश्वर शर्मा, माधव जालान, ईश्वर प्रसाद पटवारी आदि मौजूद रहे।