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जरूरत के चलते बुजुर्गों ने झेली जहमत

Sun, 20 Nov 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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पीएनबी की रामगढ़ताल में रुपये निकालने पहुंचे बुजुर्ग। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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नोटबंदी के बाद शनिवार को बुजुर्गों को सहूलियत देने के लिए लागू किया गया नियम कइयों के लिए परेशानी का कारण बन गया। बैंकों में पहुंचे सीनियर सिटीजन को पूरा दिन खड़े-खड़े ही काटना पड़ा। ये बुजुर्ग अपनों की जरूरत या फिर अपनी दवा की चिंता में घर से बैंक पहुंचे थे। घर पर नौजवान सदस्य लाइन में खड़े रहने को तैयार थे, लेकिन सिर्फ बुजुर्गों के पुराने नोट बदलने की बाध्यता ने वरिष्ठ नागरिकों का परेशान कर दिया।
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बैंकों को सरकार की ओर से मिले नए दिशा निर्देशों के क्रम में शनिवार को सिर्फ सीनियर सिटीजन को ही हजार और पांच सौ के नोट बदलने का मौका दिया गया। ऐसे में बैंकों में नोट बदलने के लिए लगने वाली कतार रोज की अपेक्षा कम थी, लेकिन बुजुर्गों की परेशानी ज्यादा। आलम यह था कि जिनके घरों में दूसरे शख्स नोट बदलने के लिए बैंक जाने को तैयार थे, उनकी जगह परिवार के बुजुर्ग सदस्य को जिम्मेदारी उठानी पड़ी। उम्र और सेहत सुविधा के बाद भी उन्हें परेशान कर गई।

हालांकि ज्यादातर बैंकों पर नोट बदलने के लिए बने काउंटरों पर भीड़ कम थी, लेकिन कचहरी के यूनियन बैंक, बरगदवा के बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई शाखाओं पर बुजुर्गों की लाइन दिखी। ऐसे में उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। ऐसे में कई बार बुजुर्ग लाइन में लगे ही जमीन पर बैठकर थोड़ी देर अपने पैरों को आराम देते भी नजर आए। यहां धड़ल्ले से चल रहे नोट पांच सौ और हजार के नोट अब भी शहर के कई इलाकों में आसानी से चलाए जा रहे हैं। बक्शीपुर के आसपास इलेक्ट्रॉनिक सामानों की दुकानों पर प्रचलन से बाहर किए गए नोट अब भी चलन में हैं। दुकानदार बड़ी खरीदारी पर ग्राहकों से बिना किसी ना-नुकर के इन नोटों को स्वीकार कर रहे हैं। कुछ किराना व्यापारी भी ज्यादा खरीदारी की सूरत में ग्राहकों से ये नोट ले रहे हैं। खजनी के रामगोपाल ने बताया कि शादी के लिए खरीदारी करने मंडी आए थे। 15 हजार की खरीदारी की। 10 हजार रुपये बड़े नोट की शक्ल में थे। दुकानदार को अपनी डिमांड बताई और पुराने नोट देने की बात कही। इस पर उसने बिना टालमटोल के सामान दे दिया और बदले में रकम ले ली।
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दो हजार के नोट का टूटना मुश्किल हजार और पांच सौ के नोट बंद होने के बाद अब प्रचलन में आया दो हजार का नोट कई लोगों के लिए परेशानी का सबब साबित हो रहा है। परिजन के इलाज के सिलसिले में शहर आए राकेश वर्मा और स्वप्निल की परेशानी कुछ ऐसी ही थी। एटीएम से मिला दो हजार का नोट इनके लिए तब दिक्कत खड़ी कर गया, जब इसे लेकर वे दुकानों पर पहुंचे। स्वप्निल ने बताया कि ढाबे से खाना लाने गया तो दुकानदार ने टूटा न होने की बात कहते हुए खाना देने से मना कर दिया। राकेश ने दो हजार का नोट ढाबे पर जमा कर अस्पताल में भर्ती परिजन के लिए खाने का इंतजाम किया। दूसरी ओर कई छोटे दुकानदारों ने बताया कि हजार और पांच सौ का नोट बंद होने के चलते दो हजार के नोट का टूटा दे पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
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