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‘गणित के बिना राज्य की संपन्नता संभव नहीं’

Mon, 20 Feb 2017 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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मारवाड़ बिजनेस स्कूल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। संगोष्ठी में 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया और 36 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
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संगोष्ठी के दूसरे दिन मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गणितीय ज्ञान के बिना किसी भी विषय में शोध संभव नहीं है। अनपढ़ भी गणित का प्रयोग करता है और पढ़ा-लिखा भी। परंतु जब यही गणित उच्च पायदान पर जाता है तो सूक्ष्म विषयों को चरमोत्कर्ष पर पहुंचा देता है। गणितीय ज्ञान बिना संपन्न राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती है। वहीं तकनीकी सत्र के दौरान एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुयश नारायण मिश्र ने कहा कि डायवरजेंट सीरीज का प्रयोग विभिन्न विषयों में निहित है जो कि गणित विषय के लिए काफी महत्वपूर्ण कदम है।

केआईपीएम गीडा के डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि प्रोबेबिलिटी थ्योरी का प्रयोग प्राचीन काल से अतिश्योक्ति गणितीय परिकल्पना एवं मनुष्य के जीवन काल में जन्म से लेकर मृत्यु तक एक पूर्वानुमान एवं भविष्यवाणी से अपने दिनचर्या को सुगम एवं सुलभ बनाते हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. वीएस वर्मा ने कहा कि गणित विषय के न्यू ट्रेंड में फ्रीपटो सिद्धांत का संबंध अंग्रेजी भाषा के साथ है।
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वहीं, बेहतर शोधपत्र के लिए उत्कर्ष त्रिपाठी और दीपा रूंगटा को पहला, हरी शंकर साहनी एवं रामानंद साहनी को दूसरा और तरुणा पांडेय और निधि गोयल को तीसरा पुरस्कार दिया गया। आरती गोयल और श्यामपाल यादव को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। डॉ. पीयूष कुमार, डॉ. सुनील कुमार पांडेय और डॉ. पूनम ओझा ने संचालन तथा प्रो. बीएल सर्राफ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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