संगोष्ठी को संबोधित करते मधेसी आंदोलन के राजनीतिक कार्यकर्ता ओमप्रकाश सर्राफ
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कुशीनगर उच्च अध्ययन संस्थान ने रविवार को ‘भारत नेपाल संबंध: मधेसी संकट’ के परिप्रेक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन किया। इस मौके पर नेपाल में मधेशियों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही कहा गया कि इस मसले पर संविधान संशोधन भी निर्मूल साबित हो रहा है।
पैडलेगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में आयोजित संगोष्ठी में नेपाल के पूर्व सांसद आत्माराम शाह ने कहा कि यह सही है कि मधेसियों की समस्याओं को दूर करने के लिए संविधान में संशोधन किया गया, लेकिन संविधान सभा ने मधेसियों के प्रतिनिधियों से बात करने की जरूरत नहीं समझी। इस कारण इस संशोधन से मधेशियों का कोई हित नहीं हो सका है।
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रियदर्शी ने कहा कि नेपाल में मधेशियों को हाशिए पर ढकेल दिया गया है। राजतंत्र के खात्मे के बाद संविधान सम्मत भेदभाव मधेसी समाज पर लाद दिया गया है। नेपाल की सद्भावना पार्टी के ओमप्रकाश सर्राफ ने कहा कि मधेशी आंदोलन हर जगह होने वाले विभेद-विरोधी आंदोलन का प्रतीक है। नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकिशोर ने कहा कि नेपाल में वर्तमान संविधान ऐसा होना चाहिए था कि नेपाल में पूर्व द्वंद्व और वर्तमान द्वंद्व का समाधान हो सके।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आनंद पांडेय ने किया। इस मौके पर अशोक चौधरी, लाल बहादुर, अरुण अग्रहरी, उन्मेष सिन्हा, मधुसूदन सिंह, चंद्रशेखर, राजाराम चौधरी, शिवनंदन सहाय, अजय कुमार, नीरज, वेद प्रकाश, मनोज सिंह आदि मौजूद थे।