ब्लॉक प्रमुख चुनाव में समाजवादी पार्टी 14 स्थानों में जीत दर्ज कर अपनी पीठ चाहे जितना थपथपा ले पर विपक्ष के किलेबंदी को नहीं तोड़ पाई। हमेशा से जिस ब्लॉक पर मंदिर समर्थक प्रत्याशी जीतता आया था इस बार भी उसने ही जीत का परचम लहरा दिया। हालांकि सत्ता रूढ़ दल के प्रत्याशी का आरोप है कि उसकी हार के पीछे उसके ही दल के बड़े नेताओं का हाथ है। एक माफिया के लिए पार्टी के बड़े नेताओं ने पूरी ताकत झोक दी, इसके बावजूद उसकी हार को बचा नहीं पाए।
ब्लॉक प्रमुख चुनाव में 14 ब्लाकों में सपा ने जीत दर्ज की है। जबकि विपक्ष के खाते में चार स्थान आया है। विपक्षी दल ने इस चुनाव में अपना अधिकृत प्रत्याशी नहीं उतारा था। फिर भी भाजपा के कई नेताओं ने अपने-अपने ब्लॉकों में प्रत्याशी उतार कर सपा की हवा निकाल दी। जंगलकौड़िया ब्लॉक का प्रमुख हमेशा से गोरक्षनाथ मंदिर का आशीर्वाद पाने वाला ही रहा है। इस बार मंदिर की तरफ से पूर्व प्रमुख बृजेश यादव को मैदान में उतारा गया। उनके मुकाबले संदीप यादव मैदान में उतर गए। संदीप यादव सत्ता पक्ष के प्रत्याशी थे। संदीप को समर्थन देने के लिए प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री राधेश्याम सिंह उनके गांव पहुंचे थे। क्षेत्र पंचायत सदस्यों के साथ बैठक कर दावा किया था कि हर हाल में यहां पर जीत सपा प्रत्याशी की होगी। चुनाव के बाद जो परिणाम आया वह चौंकाने वाला था। बृजेश यादव ने 98 वोटों से जीत दर्ज कर मंत्री के दावों की पोल खोल दी।
बांसगांव ब्लॉक से जरायम की दुनिया के चर्चित चेहरे राकेश यादव पर सपा ने दांव लगाया था। उनके मुकाबले पूर्व प्रमुख शिवाजी सिंह ने राधिका देवी को मैदान में उतारा। राकेश यादव के लिए पूर्व मंत्री जयप्रकाश यादव समेत कई नेताओं ने प्रचार किया। उनकी गाड़ियों का काफिला समर्थकों सहित बांसगांव ब्लॉक के गांवों में घूमा। सत्ता की हनक भी दिखाई गई, फिर भी उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। शिवाजी के साथ सांसद कमलेश पासवान खड़े थे। चरगांवा ब्लॉक से सांसद कमलेश पासवान ने अपने छोटे भाई विमलेश को चुनाव लड़ाया। सपा की तरफ से विनोद पर दांव लगाया गया। हर कोशिश के बाद सपा को हार का सामना करना पड़ा।
कौड़ीराम ब्लॉक पर लगभग 32 सालों से एक ही परिवार के कब्जे को सपा की टीम नहीं तोड़ पाई। पूर्व विधायक अंबिका सिंह का सियासी सफर यहां की ब्लॉक प्रमुखी से शुरू हुआ था। इस ब्लॉक पर तभी से उस परिवार का कब्जा है। यहां की कमान उनके बेटे विपिन सिंह के हाथ में रहती है। उन्होंने इस बार शैला देवी को मैदान में उतारा और सपा की प्रत्याशी मीना को हराकर चुनाव जीत लिया।