फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हंगामे के बाद जागा यूनिवर्सिटी प्रशासन

Thu, 18 May 2017 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
छात्रों से बात करते अधिकारी। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में बुनियादी सुविधाएं नदारद होने से खफा छात्रावासियों के हंगामे के बाद बुधवार को समस्याओं के निस्तारण का काम शुरू हो गया। सुबह कुलपति के साथ हुई बैठक के बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. सतीश चंद पांडेय ने इंजीनियर, स्टेट ऑफिसर के साथ बैठक की। इसके बाद उनके साथ हॉस्टल का निरीक्षण कर बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया और खामियों को तुरंत निस्तारित करने के ठेकेदारों को निर्देश दिए। निर्देश मिलने के बाद बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। बुधवार को संतकबीर छात्रावास और गौतमबुद्ध छात्रावास के शौचालयों में टूटे दरवाजे की मरम्मत का काम शुरू हो गया।
विज्ञापन


मंगलवार रात करीब 10:30 बजे बिजली, पानी के साथ हॉस्टल में मौजूद बदइंतजामियों को लेकर छात्रावासियों का आक्रोश फूट पड़ा था। आक्रोशित छात्र मोहद्दीपुर मार्ग को जाम कर धरने पर बैठ गए थे। सूचना पर पुलिस, सिटी मजिस्ट्रेट के साथ चीफ प्रॉक्टर भी मौके पर पहुंच गए थे। काफी देर तक छात्रों को मनाने की कोशिश की गई, मगर समस्या के त्वरित निस्तारण की मांग को लेकर छात्र अड़े रहे। छात्रों का आरोप था कि बुनियादी सुविधाओं को लेकर यूनिवर्सिटी के जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। हर बार सड़क पर उतरने के बाद ही कोई कार्रवाई होती है।

नहीं संजीदा हैं वार्डेन
मंगलवार की रात करीब एक बजे तक छात्रों और पुलिस के बीच बातचीत का सिलसिला जारी था। छात्र मांगो को लेकर अडिग थे, वहीं पुलिस किसी भी तरह छात्रों से रास्ता जाम खुलवाने की कमी से जूझ रही थी। देर रात तक चली इस मान मनव्वल के बाद चारों हॉस्टलों का कोई भी जिम्मेदार मौके पर मौजूद नहीं था। वार्डेन, सुपरिटेंडेट किसी ने भी न तो मंगलवार की रात प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने की जहमत उठाई। बुधवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा रहा। प्रॉक्टर छात्रों की समस्याएं सुन रहे थे और हॉस्टल का कोई जिम्मेदार मौके पर मौजूद नहीं था। 
विज्ञापन


दरवाजे पर लटका रहता है ताला
चारो हॉस्टलों में वार्डेन और सुपरिटेंडट के बैठने के लिए कमरा बनाया गया है, मगर इन कमरों में अक्सर ताला ही लटका रहता है। छात्रों को समस्या होती है तो वो सीधे इंजीनियर और यूनिवर्सिटी प्रशासन का घेराव करते हैं, जबकि सही प्रक्रिया के तहत उनकी शिकायतें वार्डेन के हाथों अग्रसारित होकर इंजीनियरिंग विभाग में पहुंचनी होती है। सही प्रक्रिया से हॉस्टल की समस्याएं ना पहुंचने से भी छात्रों की शिकायतों की सुनवाई नहीं हो पाती है।

बाथरूम में गंदगी के ढेर
यूनिवर्सिटी के कबीर हॉस्टल और स्वामी विवेकानंद हॉस्टल के ज्यादातर बाथरूम बंद पड़े हैं। इनमें गंदगी के ढेर लगे हैं। जो बाथरूम ठीक हैं, उनके दरवाजे और कुंडी तक गायब हैं। एलएलबी द्वितीय वर्ष के छात्र पुनीत त्रिपाठी का कहना है कि पानी की टंकी नहीं है। इससे पानी आपूर्ति बाधित रहती है। गंदे पानी की सप्लाई हो जाती है। हॉस्टल में 20 बाथरूम हैं। इसमें से दस बंद रहते हैं। छात्र आशीष कुमार पांडेय के मुताबिक हॉस्टल समस्याओं के घर हैं। छात्र अमित गुप्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी के अधिकारी और वार्डेन हास्टल के छात्रों की खोज खबर नहीं लेते हैं। 
विज्ञापन


मकड़ी के जाले और मिट्टी से सने बाथरूम 
यूनिवर्सिटी के स्वामी विवेकानंद हास्टल के बाथरूम मकड़ी के जाले और मिट्टी से सने हैं। इसमें पानी की सप्लाई तक नहीं दी गई है।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें