जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की व्यवस्था कई दिनों से ठप होने पर शनिवार को मरीजों के सब्र टूट गया। लोगों ने वहां जमकर हंगामा किया। किसी तरह उन्हें समझाकर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
जिला अस्पताल में डॉक्टर न होने से एक फरवरी से ही सीटी स्कैन नहीं हो पा रहा है। यहां आने वाले मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। पहले जिला अस्पताल और फिर यहां से मेडिकल कॉलेज के सफर में तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा वहां सीटी स्कैन के लिए 820 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, प्राइवेट डायग्नोसिस सेंटर में कम से कम 1500 रुपये खर्च करने होते हैं, जबकि जिला अस्पताल में यह जांच 500 रुपये में हो जाती थी। इसके अलावा नि:शुल्क इलाज की सुविधा का लाभ लेने वाले बीपीएल कार्ड धारकों को भी अब रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
इन्हीं सब समस्याओं को लेकर शनिवार को मरीजों और उनके तीमारदारों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने लोगों को समझाकर मेडिकल कॉलेज रेफर किया। वहीं डॉक्टर की नियुक्ति को लेकर भी एसआईसी और एडी हेल्थ में खींचतान चल रही है। एसआईसी का कहना है कि दूसरे जिले में ट्रेंड डॉक्टर होने के बावजूद एडी हेल्थ की जिद के कारण उनकी तैनाती यहां नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि जिन टेक्नीशियनों की जरूरत नहीं है उन्हें बेवजह संबंद्ध किया गया है और जिस डॉक्टर की जरूरत है उसकी नियुक्ति नहीं की जा रही है। दोनों ही अफसरों के बीच के मतभेद में जिला अस्पताल में सीटी स्कैन ठप पड़ा हुआ है।
वहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट का कहना है कि आए दिन मरीजों और उनके तीमारदारों से कहासुनी हो रही है। इसके कारण अन्य जांच के लिए आने वाले मरीजों के लिए भी समस्या खड़ी हो जा रही है।
एडी हेल्थ को डॉक्टर के लिए कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। उनसे कहा जा चुका है कि जब तक शासन से ट्रेंड डॉक्टर नहीं मिलते हैं। तब तक एक डॉक्टर को अटैच कर दें। ताकि मरीजों को न लौटना पड़े।
- डॉ. एचआर यादव, एसआईसी
रोजाना लौटाई जा रहीं हैं गर्भवती
महिला अस्पताल से रोजाना ही गर्भवती लौटाई जा रही हैं। यहां जनवरी के शुरुआत से ही एक ही रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे काम चल रहा है, जबकि सीएमओ के अधीन कई ट्रेंड डॉक्टर हैं जो इस काम को कर सकते हैं। एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने की वजह से 50 महिलाओं का ही एक दिन में अल्ट्रासाउंड हो पाता है। वह भी रेडियोलॉजिस्ट जिला अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र से भेजे गए हैं, जिसे एसआईसी वापस मांग चुके हैं।