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ऐसा बनो कि जो टकराए चूर-चूर हो जाए : भागवत

Mon, 03 Oct 2016 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गीता वाटिका मे भाईजी के समाधि स्थल का दर्शन करते मोहन भागवत। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने गोरखनाथ मंदिर में भले ही सर्जिकल स्ट्राइक के सवाल को टाल दिया हो, लेकिन गीता वाटिका में उन्होंने कहा कि खुद को ऐसा बनाओ कि जो टकराए वह चूर-चूर हो जाए। उन्होंने कहा कि सीमा पर गोलाबारी की जाती है, एक-दूसरे का जवाब दिया जाता है। इसके लिए कभी-कभी सीमा के भीतर जाकर दखलंदाजी भी करनी पड़ती है, लेकिन क्या यही सुरक्षा है? जब सुरक्षित रहने के लिए सुरक्षा करनी पड़े तो इस सुरक्षा का कोई मतलब नहीं। हालांकि सुरक्षा को लेकर इस गंभीर चर्चा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।
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भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के 125वें जयंती वर्ष में चल रहे कार्यक्रम के क्रम में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भागवत ने एक बार फिर भारत के विश्व गुरुत्व की चर्चा की और कहा कि ईश्वर ने भारत को पूरी दुनिया की सुरक्षा और उसके उत्थान के लिए तैनात किया है। ऐसे में भारत को आगे आना होगा, नहीं तो दुनिया को ऐसे ही मार पड़ती रहेगी। अपने वक्तव्य की धार्मिक व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सभी तरह के संप्रदायों और पूजा पद्धतियों को मानकर ही धर्म चल सकता है क्योंकि एकता तो विविधता में ही सुरक्षित है। धर्म और संस्कृति की रक्षा का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस पर आंच आई तो देश को कोई नहीं बचा सकता।  भाईजी ने अच्छाई को जीकर दिखाया : भागवत गीता वाटिका में आयोजित संगोष्ठी में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार को शिद्दत से याद किया। उन्होंने कहा कि वे भाईजी कभी नहीं मिले लेकिन गीता प्रेस की किताबों को पढ़कर यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि किताबों में जिस अच्छाई की चर्चा होती है, भाईजी ने उसे जीकर दिखाया। उन्होंने देश-दुनिया में सस्ते धार्मिक ग्रंथ पहुंचाने के लिए गीता प्रेस की भूरि-भूरि प्रशंसा की। भाईजी की किताब ‘मानवता के मानस’ का जिक्र करते हुए  मोहन भागवत ने सनातन धर्म की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि कर्म और ज्ञान वे तथ्य हैं, जो हमें परमतत्व का रास्ता दिखाते हैं लेकिन बिना भक्ति का कर्म विनाशक साबित हो सकता है।

भाईजी के जीवन को इन तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। तीनों का समन्वय बनाने के लिए उन्होंने गीता प्रेस की किताबों के अध्ययन की सलाह दी। संगोष्ठी में स्कूल ऑफ गुड गवर्नेस एंड पालिसी एनिलिसिस नई दिल्ली के डीजी प्रो. हनुमान प्रसाद दीक्षित और गीता प्रेस के संपादक राधेश्याम खेमका ने भी अपने विचार रखे। संचालन ओमजी उपाध्याय ने किया। इस दौरान विष्णु प्रसाद अजितसरिया, द्वारिका प्रसाद गोयल, उमेश सिंहानिया, सांसद जगदंबिका पाल व शिवप्रताप शुक्ल, मेयर डॉ. सत्या पांडेय, पूर्व मेयर अंजू चौधरी, डॉ. समीर सिंह, राकेश सिंह पहलवान, राहुल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। गोरक्षा पर उठाया सवाल आरएसएस प्रमुख ने गोरक्षा के मंतव्य पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश में जितनी भी गाएं कटती हैं, वो सब चोरी से नहीं आतीं। कुछ खरीदी हुई भी होती हैं। जिसे मां का दर्जा दिया जाता है, उसे रुपये के बदले कटने के लिए भेज दिया जाए, यह बात समझ से परे है। उन्होंने कहा कि गोरक्षा केवल कानून में न रहे बल्कि हकीकत में बदले, इसकी जरूरत है। ऐसा सामाजिक जागरूकता से ही हो सकता है।
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मोहन भागवत ने गोरखनाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत रविवार को गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन किया। साथ ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गीता वाटिका के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए मोहन भागवत करीब 12 बजे गोरखपुर पहुंचे। संघ कार्यालय में पदाधिकारियों से मिलने के बाद वह 3.10 बजे गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। पुजारियों के मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने दर्शन-पूजन किया। उसके बाद वह ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर पहुंचे। वहां पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। उसके बाद वह मठ में स्थित दुर्गा मंदिर में महंत आदित्यनाथ से मिलने गए महंत ने उन्हें अंग वस्त्र भेंट किया। गोरखनाथ मंदिर में वह मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। उनसे जब सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कुछ बोलना होगा तो मंच से बोलेंगे। जिस ट्रेन में वह सवार थे, उसके चार घंटे लेट से पहुंचने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह आप इस बारे में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य से पूछिए।
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