यहां की नदियां भी कर रही हैं गंगा को प्रदूषित
गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शनिवार को कानपुर में गंगा को निर्मल करने पर मंथन किया गया। इसके लिए कई तरह की कार्ययोजनाएं भी बनाई गईं, लेकिन गंगा को प्रदूषित कर रहीं गोरखपुर की सहायक नदियों के पानी को साफ करने की योजनाएं पिछले करीब एक दशक से कागजों में ही फंसी हुईं हैं।
गोरखपुर क्षेत्र की छह नदियों का पानी गंगा गंगा में पहुंचता है। इनमें राप्ती, रोहिन, घाघरा, सरयू, आमी और कुआनो शामिल हैं। राप्ती, रोहिन और आमी नदी में प्रदूषण रोकने के लिए लंबे अरसे से कवायद चल रही है। गोरखपुर की औद्योगिक इकाईयों का गंदा पानी दशकों से आमी नदी में गिर रहा है। वहीं करीब दो तिहाई शहर का गंदा पानी बिना शोधन के राप्ती और रोहिन नदी को दूषित कर रहा है। कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से कई बार इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन आज तक सारी योजनाएं केंद्र और प्रदेश सरकार की फाइलों में घूम रहीं हैं। शहर में प्रदूषित होने वाली ये नदियां गंगा में मिल कर उसका प्रदूषण स्तर भी बढ़ाती हैं।
गंगा की सहायक नदियां हैं राप्ती और रोहिन
नेपाल से निकलने के बाद राप्ती नदी कपड़वाड़ घाट के पास गोरखपुर-देवरिया सीमा पर घाघरा नदी में मिलती है। फिर घाघरा नदी देवरिया होते हुए बलिया में गंगा में मिल जाती है। वहीं रोहिन भी नेपाल से निकलने के बाद गोरखपुर में डोमिनगढ़ के पास राप्ती नदी में मिल जाती है।
राप्ती की सहायक नदी है आमी
आमी नदी का उद्भव केंद्र सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज में रसूलपुर क्षेत्र का सिकहरा ताला है। यह नदी सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर और गोरखपुर में करीब 102 किलोमीटर बहते हुए गोरखपुर के कौड़ीराम के पास सोहगौरा क्षेत्र में राप्ती नदी में मिलती है।
कुआनो घाघरा में मिलती है
कुआनो नदी गोरखपुर के गोला तहसील क्षेत्र में हरिहरपुर में घाघरा में मिल जाती है।
राप्ती और रोहिन नदी के लिए बनी है 350 करोड़ की योजना
नमामि गंगे योजना के अंतर्गत राप्ती और रोहिन नदी में गिरने वाले नालों के पानी के शोधन के लिए दो एसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेशन के लिए कुल 350 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। बुधवार को जल निगम के एक्सपर्ट ने आकर पूरी परियोजना के साइट का निरीक्षण किया है। इस योजना के बनने के बाद शहर के तमाम घरों का गंदा पानी शोधन के बाद ही राप्ती और रोहिन नदी में गिरेगा।
- रतनसेन सिंह, परियोजना प्रबंधक, रामगढ़ताल परियोजना
करीब दो दशक से बन रही है गीडा में सीईटीपी की योजना
आमी नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए गीडा प्रशासन करीब दो साल से कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की योजना तैयार कर रहा है, लेकिन आज तक यह धरातल पर नहीं उतर सकी है। अभी हाल में गीडा बोर्ड ने गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित जल के शोधन के लिए करीब 76.79 करोड़ रुपये की लागत से 15 एमएलडी क्षमता के सीईटीपी को स्वीकृति दी है।