गोरखपुर। आमतौर पर गंभीर दिखने वाला इंजीनियरिंग कॉलेज का माहौल बृहस्पतिवार को कुछ जुदा सा था। माहौल में गर्मजोशी थी तो परिसर में खुशियां ही खुशियां। 42 साल पहले बिछड़े साथी एक बार फिर साथ जो थे।
दरअसल परिसर में 1974 के पासआउट मालवीयन्स री-यूनियन आयोजित थी। ऐसा लगा कि उम्र भूल कर फिर से युवा हो गए मालवीयन्स। पहले पहचानने की कोशिश की, फिर गले लगाया और खो गए सुनहरी यादों में। देश के विभिन्न स्थानों से आए इंजीनियर्स के मिलन के दौर में सुबह से कब शाम हो गई पता ही नहीं चला।
तय कार्यक्रम के मुताबिक साढ़े 10 बजे से ही मालवीयन्स के आने का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे लोग आते गए माहौल खुशनुमा होता रहा। सब इकट्ठा हुए तो मंच सज गया। मंच पर थे तत्कालीन शिक्षक और वर्तमान मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह।
मंच के सामने आगे वाले हिस्से में पुराने मालवीयन्स सपत्नीक मौजूद थे जबकि पिछले हिस्से में इस अविस्मरणीय क्षण के गवाह बन रहे थे आज के मालवीयन्स। फिर शुरू हुआ परिचय और उपलब्धियों का सिलसिला। एक-एक कर पुराने छात्र आते गए और परिचय देते गए। उनकी उपलब्धियां गिनाने की जिम्मेदारी मंच से बखूबी संभाल रहे थे, उन्हीं के बैच के जीएस संधू, जो कार्यक्रम के संचालक की भूमिका में थे। उसके बाद गुरुओं को सम्मानित करने का कार्यक्रम चला।
सम्मानित होने वाले शिक्षकों में डॉ. आरसी गोयल, डॉ. एसएस दास, डॉ. सीपी हिंगुरानी, डॉ. एनपी शुक्ल, डॉ. वीवी सिंह, डॉ. एसएन पांडेय, डॉ. एएस बागची शामिल रहे। शिक्षकों ने बारी-बारी से अपने संबोधन में पुराने दौर के संस्मरण को साझा किया तो कार्यक्रम के आयोजक पॉवर कार्पोरेशन के एमडी एपी मिश्रा और संचालक जीएस संधू भी अपने सहपाठियों को देखकर उत्साहित हो उठे और साथ बिताए तमाम खूबसूरत पलों की चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में कुलपति ने मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से यूनिवर्सिटी बनने के विकास की चर्चा करते हुए प्लेसमेंट की समस्या पर चर्चा की और पुराने मालवीयन्स से इसे लेकर मदद का आग्रह किया।