फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हजार खर्च कर भी नहीं जांच सके किचन की ‘सेहत’

Fri, 03 Jun 2016 09:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
मिलावटी घी - फोटो : demo pics
विज्ञापन
हजारों रुपये खर्च कर भी शहरी अपने किचन में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता नहीं जांच सके। विभिन्न मोहल्लों के 30 से अधिक लोगों ने नवंबर और दिसंबर 2015 में एक-एक हजार रुपये फीस जमा कर खाद्य सुरक्षा विभाग को जांच के लिए नमूने दिए थे, मगर अभी तक इनमें से किसी एक की भी जांच रिपोर्ट नहीं आ सकी।
विज्ञापन


ऐसे में अब ये शहरी अपने को छला महसूस कर रहे हैं। ऐसी जांच का क्या फायदा, जब रिपोर्ट ही समय पर न मिल सके। इस संबंध में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार राय का कहना है कि रिपोर्ट को लेकर जांच लैब के अफसरों से बात हुई है, उन्होंने जल्द ही भेजने का आश्वासन दिया है।

खाद्य सुरक्षा विभाग के तहत कोई भी व्यक्ति अपने रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एक हजार रुपये फीस जमा कर जांच सकता है। विभाग ने प्रमुख बाजारों, पार्क और चौराहों पर इस योजना का खूब प्रचार-प्रसार भी किया। इससे प्रभावित होकर 30 से अधिक लोगों ने जांच के लिए नमूने दिए। इनमें सर्वाधिक नमूने तेल, घी और मसाले के थे, मगर विभाग की लापरवाही की वजह से अब तक जांच रिपोर्ट ही नहीं आ सकी।
विज्ञापन


रिपोर्ट की लेटलतीफी का आलम यह है कि विभाग जिन भी दुकानों से नमूना लेता है, जब तक उसकी रिपोर्ट आती है, संबंधित खाद्य पदार्थ का स्टाक ही उस दुकान से बिक चुका होता है। ऐसे में जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता क्योंकि अगर जांच में वह सेहत के लिए हानिकारक भी मिलता है तो तब तक लोग उसे खा चुके रहते हैं।
विज्ञापन


महकमे के मुताबिक अधिकतम पखवारे भर में नमूनों की जांच रिपोर्ट आ जानी चाहिए, मगर कोई भी रिपोर्ट तीन महीने के पहले आती ही नहीं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें