जमीन अधिग्रहण को लेकर करीब पांच साल पहले नोएडा के भट्टा परसौल से निकलकर गोरखपुर पहुंची चिंगारी का खौफ अभी भी यहां के प्रशासन में कायम है। यह खौफ ही है जो साढ़े आठ सौ लोगों को उनके खुद के आशियाने के सपने को पूरा नहीं होने दे रहा। प्राधिकरण को पूरी रकम जमा करने के बाद भी सैकड़ों की संख्या में ये आवंटी कब्जे के लिए सालाें से जीडीए, प्रशासन और शासन के चक्कर लगा रहे हैं। इनमें 261 के नाम तो जमीन, रजिस्ट्री तक हो चुकी है। इन आवंटियों को कब्जा दिलाने को लेकर संजीदा रहे जीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश कुमार तिवारी ने डीएम से फोर्स की मांग की थी। मगर एक बार फिर प्रशासन कानून व्यवस्था खराब होने की दुहाई के आड़ में मामले को टालने की तैयारी में है।
उपाध्यक्ष की अपील पर डीएम संध्या तिवारी ने एडीएम सिटी से रिपोर्ट मांगी थी और उन्होंने सदर तहसील प्रशासन से। विश्वस्त प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक तहसील प्रशासन ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर लिए हैं कि मामला अत्यंत संवेदनशील है इससे कानून व्यवस्था खराब होने के संकट की प्रबल संभावना है लिहाजा उच्चाधिकारी का नेतृत्व जरूरी है। वहीं एडीएम सिटी रजनीश चंद्र ने अमर उजाला को बताया कि जीडीए ने कब्जा दिलाने के लिए डीएम को पत्र तो लिखा था मगर अभी इसे लेकर प्राधिकरण, प्रशासन और पुलिस के बीच एक बैठक और कर आगे की रणनीति बनाने का निर्णय हुआ था।
उधर आवंटियों का कहना है कि आखिर यह स्थिति कब तक बनी रहेगी। जो लोग कोर्ट गए हैं वे इसलिए नहीं गए कि वे जमीन नहीं देना चाहते । वे तो मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पूर्व जीडीए उपाध्यक्ष अवधेश कुमार तिवारी का भी यही मानना था कि जमीन जीडीए के नाम हो चुकी है। कोर्ट ने कई वादों को खारिज कर दिया और फैसला तो मुआवजा बढ़ने या नहीं बढ़ने पर है। ऐसे में आवंटियों को कब्जा न दिलाने से जीडीए की छवि पर बट्टा लग रहा है।
बता दें कि राप्तीनगर आवासीय योजना के लिए जिन 433 काश्तकारों से जमीन अधिग्रहित की गई थी उनमें से 24, मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर कोर्ट चले गए। इनमें से सात काश्तकारों के वादों को अतिरिक्त जिला जज गोरखपुर खारिज भी कर चुके हैं। बावजूद इसके इंतजामिया बाकी के प्लाटों पर भी अभी तक इन आवंटियों को कब्जा नहीं दिला पाया है।
57 काश्तकारों ने नहीं लिया है मुआवजा
राप्तीनगर आवासीय योजना के लिए पोखरभिंडा उर्फ करीमनगर की 5.918 हेक्टअर जमीन अधिग्रहित की गई थी जिसके कुल खातेदार 129 थे। इनमें से 110 खातेदार ने मुआवजे की रकम ले ली है जबकि 19 ने नहीं ली। उनके हिस्से की रकम आरडी में जमा है। इसी तरह मानबेला गांव की 17.380 हेक्टेअर जमीन योजना के लिए अधिग्रहित की गई थी जिसके कुल खातेदारों की संख्या 304 है। इनमें से 266 ने भुगतान ले लिया है जबकि 38 काश्तकारों की धनराशि आरडी में जमा है। यानी कि दोनों गांवों की जमीनों से जुड़े कुल 433 काश्तकारों में से 57 ने अभी तक मुआवजा नहीं लिया है।
अनिश्चित कालीन प्रदर्शन की तैयारी में आवंटी
रकम जमा करने और रजिस्ट्री के बाद भी पांच साल से अधिक समय से कब्जा नहीं मिलने से खफा राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना आवंटी संघर्ष समिति के तत्वावधान में रजिस्ट्री करा लेने वाले सभी 261 आवंटी अनिश्चित कालीन धरना-प्रदर्शन की तैयारी में हैं। उन्होंने इस संबंध में हाल ही में प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश कुमार तिवारी को सूचना भी दी थी। इस अल्टीमेटम के बाद से ही उपाध्यक्ष ने डीएम को पत्र लिखकर कब्जा दिलाने के लिए फोर्स मुहैया कराने की अपील की थी।
राप्तीनगर आवासीय योजना-
- सदर तहसील के दो गांवों पोखरभिंडा और मानबेला की जमीन अधिग्रहित कर तैयार की गई योजना
- पोखरभिंडा के 129 खातेदारों से 5.918 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहित हुई, 28 नवंबर 2005 को जीडीए के नाम दर्ज हो गई यह जमीन
- मानबेला के 304 खातेदारों से ली गई 17.380 हेक्टेअर जमीन
- कुल 57 एकड़ में फैली है योजना, 892 भूखंड हैं
- प्लाट विकसित करने के लिए 2007-08 में निकला टेंडर
-12 जून 2009 से 13 मई 2010 तक 892 भूखंडों के आवंटन की हुई कार्रवाई
- आवंटियों से प्राधिकरण को 53.24 करोड़ रुपये मिले
- इसी बीच 2010-11 में जमीन अधिग्रहण को लेकर नोएडा में भट्टा परसौल की घटना हुई।
- उसकी चिंगारी गोरखपुर भी पहुंची और यहां भी काश्तकार मुआवजा बढ़ाने की मांग करने लगे
- उन्होंने काम रोकवा दिया, तब तक बिजली, सड़क, नाली और पार्क आदि के 60 फिसदी काम ही पूरे हो पाए थे
- इन कामों पर 10 करोड़ रुपया खर्च कर चुका है प्राधिकरण
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भूखंडों की श्रेणी संख्या आवंटन रजिस्ट्री हुई रजिस्ट्री नहीं हुई रिक्त भूखंड
एचआईजी प्रथम 12 11 6 5 1
एचआईजी द्वितीय 144 129 73 56 15
एमआईजी 228 217 120 97 11
एलआईजी 199 192 59 133 7
ईडब्लूएस 308 294 3 291 14
जू. हाईस्कूल 1 0 0 0 1
कुल 892 843 261 582 49