रेलवे को अब अपने कैश को बैंक तक पहुंचाने में हिफाजत की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इस काम के लिए रेलवे स्टाफ की ड्यूटी लगाने की कसरत भी बचेगी। रेलवे परिसर से रकम के कलेक्शन की पहल बैंक ही करेगा। इसके लिए पूर्वोत्तर रेलवे और स्टेट बैंक के बीच करार हो चुका है। नई व्यवस्था को 17 मई से प्रभावी किया जाएगा।
रेलवे के आरक्षण केंद्र पर टिकट की बुकिंग से हासिल होने वाले कैश तथा स्टेशन पर जनरल टिकट की बिक्री, टिकट चेकिंग के दौरान वसूली जाने वाली जुर्माने की राशि को सरकारी खजाने में जमा किया जाता है। बैंक के सुरक्षित दायरे तक इस रकम को पहुंचाने के लिए रेलवे को कर्मचारियों के साथ-साथ वाहन, सुरक्षा टीम जैसे कई अतिरिक्त बंदोबस्त करने होते हैं।
छोटे रेलवे स्टेशनों से आरपीएफ की निगरानी में स्टेशन मास्टर कैश नजदीकी जंक्शन या रेल परिसर तक भेजते हैं। ऐसे में बैंक तक कैश जमा होने में एक से दो दिन का समय भी लग जाता है। कैश को बैंक के महफूज दायरे तक पहुंचाने का पारंपरिक ढर्रा अब बदलने जा रहा है। इसको लेकर रेलवे और स्टेट बैंक प्रबंधन के बीच नई व्यवस्था पर सहमति बनी है। इसमें एसबीआई के कर्मचारी अपनी सुरक्षा टीम के साथ रेलवे स्टेशन और आरक्षण केंद्र से कैश कलेक्शन करेंगे। हासिल हुई रकम उसी दिन रेलवे के बैंक खाते में जमा भी हो जाएगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने बताय कि करार के मुताबिक 17 मई से रेलवे का कैश एसबीआई खुद जमा कराएगा। यह व्यवस्था पूर्वोत्तर रेलवे के सभी स्टेशनों पर शुरू की जा रही है। नई व्यवस्था से कैश की हिफाजत और जमा करने के लिए जरूरी रेल कर्मियों व आरपीएफ स्टॉफ की ड्यूटी की जरूरत खत्म हो जाएगी। इस मानव संसाधन का इस्तेमाल अन्य विकास परक कार्यों में किया जाएगा।