गोरखपुर। मुसाफिरों की तकलीफ का ख्याल रखकर रेल प्रशासन ने कुछ ट्रेनों में एक्सट्रा कोच बढ़ाने के साथ ही समर स्पेशल के तौर पर ट्रेनों की तादाद तो बढ़ा दी है, लेकिन यही निर्णय रेलवे को भारी पड़ने लगा है। अब जरूरत के हिसाब से बेडरोल (चादर, कंबल, तकिया, तौलिया) की सप्लाई करना चुनौती बन गया है। हालत यह है कि मैकेनाइज्ड लांड्री में लगी मशीनों को तीन शिफ्ट में चलाया जा रहा है फिर भी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
गोरखपुर रेलवे स्टेशन से सफर की शुरुआत करने वाली नौ ट्रेनों की एसी बोगियों में यात्रियों को दिए जाने वाले बेडरोल की धुलाई मैकेनाइज्ड लांड्री में की जाती है। यहां लगी मशीनों से रोजाना करीब 3500 बेडरोल की धुलाई होती है। इस साल स्पेशल ट्रेनों की तादाद बढ़ने और मुंबई के लिए एलएचबी कोच लगाकर चलने वाली स्पेशल ट्रेन के चलते 4000 से 4500 तक बेडरोल की जरूरत है। वैकल्पिक तौर पर दो शिफ्ट में चल रही मशीनों को अब तीन शिफ्ट में चलाया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी जिस दिन एलएचबी कोच वाली ट्रेन चल रही है उस दिन स्थिति असहज हो जा रही है।
इनसेट
एक और मशीन लगाने की तैयारी
गोरखपुर। जरूरत के हिसाब से बेडरोल की सप्लाई करने के लिए मैकेनाइज्ड लांड्री में एक टन की क्षमता की एक और मशीन लगाने की तैयारी है। इसके लग जाने से रोजाना करीब एक हजार बेडरोल की धुलाई और हो सकेगी। इसके बाद बेडरोल की समस्या नहीं रहेगी।
कोट :
स्पेशल ट्रेनें और एक एलएचबी कोच वाली ट्रेन चलने से बेडरोल की मांग बढ़ी है। अभी तो इसकी सप्लाई हो जा रही है लेकिन भविष्य में दिक्कत बड़ी न हो जाए, इसे देखते हुए एक और मशीन लगाने की प्रक्रिया चल रही है। मशीन लगने के बाद रोजाना करीब 4500 बेडरोल की धुलाई हो सकेगी।
- डीके तिवारी, वरिष्ठ कोचिंग डिपो अधिकारी, एनईआर