दूसरे जनपद की ड्रग विभाग की टीम ने मेडिकल कॉलेज परिसर और आसपास की दवा की दुकानों की जांच की। इस दौरान कई दुकानों पर एंटीबॉयोटिक और दर्द की दवाएं बिना रिकॉर्ड के बेची जा रही थीं। ये दवाएं शेड्यूल एच1 में आती हैं और इन दवाओं को बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं बेचा जा सकता है। वहीं, दुकानों में दवाएं बिखरी मिली हैं, क्रय-विक्रय अभिलेखों में कमी भी मिली है। जांच की कार्रवाई से डरे दुकानदार शटर गिराकर भाग खड़े हुए। ऐसे 10 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जवाब संतोषजनक न मिलने पर लाइसेंस निरस्त होंगे।
अलीगढ़ के सहायक आयुक्त औषधि आरपी पांडेय ने बताया कि शनिवार को मेडिकल कॉलेज परिसर और आसपास की 12 दुकानों की जांच की गई है। इन दुकानों में कई कमियां मिली हैं। अधिकतर दुकानों पर शेड्यूल एच1 के तहत आने वाली दवाओं को नियमानुसार बेचते नहीं पाया गया है। दवाओं के रख-रखाव की स्थिति कहीं भी ठीक नहीं मिली हैं। क्रय-विक्रय अभिलेख में भी कमियां मिली हैं। इस दौरान 22 दवाओं के नमूने संदेह के आधार पर जांच के लिए भेजे गए हैं।
जांच में मिली कमियों पर कार्रवाई के लिए जांच आख्या औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी को भेजी गई है। टीम बीते तीन दिनों से जिले में दवा की दुकानों की जांच कर रही है। छापा मारने वाली टीम में इलाहाबाद के ड्रग इंस्पेक्टर मुकेश जैन, कानपुर नगर के एजाज, गोंडा के हेमंत, रामपुर के अनुरोध, संतकबीरनगर के देशबंधु विमल, गोरखपुर के ड्रग इंस्पेक्टर बृजेश यादव शामिल थे।
ये दुकानें मिली बंद
अपर्णा मेडिकल स्टोर, राहुल मेडिकल स्टोर, जानकी मेडिकल स्टोर, अंबे मेडिकल एजेंसी, दुर्गा मेडिकल एजेंसी, जेके मेडिकल, आलोक मेडिकल, ताज मेडिकल, लकी मेडिकल, जायसवाल मेडिकल स्टोर।