पूर्वांचल और बिहार के कई जिलों में दवा की सप्लाई के बड़े केंद्र भालोटिया मार्केट में बृहस्पतिवार को दुकानों पर छापे मारे गए। दवाओं के स्टॉक, रखरखाव, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, नारकोटिक्स एक्ट से जुड़ी पाबंदियों की स्थिति की पड़ताल का दौर कई घंटे चला। इस दौरान जांच टीम ने एक दुकान से दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी, जबकि कुल 17 दुकानों की जांच में 30 दवाओं के नमूने लिए।
गोरखपुर में अधोमानक और अपमिश्रित दवाएं बेचे जाने की जानकारी ड्रग कमिश्नर तक पहुंचने पर यह छापेमारी की गई। औषधि विभाग के अलीगढ़ के सहायक कमिश्नर आरपी पांडेय की देखरेख में छापामार टीम के सक्रिय होते ही दवा बाजार में हड़कंप मच गया। कई दवा व्यापारी रिकॉर्ड और दवाओं का रखरखाव दुरुस्त करने में जुट गए। टीम ने 17 दुकानों की जांच कर 30 दवाओं के नमूने लिए। इस बीच एके फार्मा पर एंटीबायोटिक, एंटी फंगल, एंटा एसिड दवाओं के क्रय अभिलेख न होने पर दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी।
टीम में इलाहाबाद के ड्रग इंस्पेक्टर मुकेश जैन, कानपुर के एजाज, गोंडा के हेमंत, रामपुर के अनुरोध, संतकबीरनगर के देशबंधु विमल, गोरखपुर के ड्रग इंस्पेक्टर बृजेश यादव शामिल थे। टीम के मुताबिक जिन दवाओं के नमूने लिए गए हैं, उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दवाओं की बिक्री पर लगाई जा चुकी है रोक
भॉलोटिया दवा मार्केट पहले भी सुर्खियों में रहा है। अभी चंद महीने पहले हुई जांच में दवा की दुकानों में क्रय-विक्रय अभिलेख नहीं मिले थे। ऐसे में कई दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। अधोमानक दवाओं का मामला पहले भी कई बार जांच में सामने आ चुका है। इसे मुद्दे पर दवा व्यापारी खुलकर तो सामने नहीं आते मगर इस तरह की कार्रवाई को वे प्रशासनिक उत्पीड़न जरूरत बताते हैं।
करीब दो साल पहले भॉलोटिया मार्केट में नकली दवा पकड़ी गई थी। पुलिस विभाग के एक अफसर ने दवा खरीदी और जब बैच नंबर पर नजर पड़ी तो वह मिटा हुआ मिला। संदेह के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और ड्रग इंस्पेक्टर को बुलाया था उसमें दवा नकली पाई गई। इस मामले में तो व्यापारी को जेल तक जाना पड़ा। हालांकि बाद में मामला रफा-दफा हो गया। गोरखनाथ इलाके में तो दवा की दुकान में किराने का सामान पाया गया था।