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89 करोड़ का प्रोजेक्ट, मिला 25 करोड़

Thu, 17 Mar 2016 01:17 AM IST
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर।
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शेर - फोटो : self
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रामगढ़ ताल के समीप बन रहे शहीद असफाक उल्ला चिड़िया घर की लागत सात साल में 37 करोड़ बढ़ गई। यदि निर्माण कार्य की यही रफ्तार रही तो इसकी लागत और बढ़ जाएगी। इसका कार्य कब पूरा होगा यह भी कहा नहीं जा सकता। वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यदि धन समय से मिले तो कार्य को दो साल में पूरा कर दिया जाएगा। इस चिड़ियाघर में 30 प्रकार के पशु-पक्षी रखे जाएंगे, जिसमें शेर और चीते भी हाेंगे।
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महानगर में चिड़िया घर के निर्माण की आधारशिला 2009 में रखी गई थी। उद्यान के निर्माण पर 89 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव था। कार्य शुरू कराने के लिए कुछ धन मिला। पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण काम रोक दिया गया। कार्य समय से पूरा न होने के कारण निर्माण कार्य की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। जो कार्य 89 करोड़ में पूरा होना था 7 साल में उसकी लागत बढ़ कर 126 करोड़ हो गई है। इसे  2014 में ही पूरा हो जाना था, पर जिस स्थान पर चिड़िया घर बनाया जा रहा है उस जमीन पर मिट्टी भराई का कार्य अब तक नहीं पूरा हो पाया है।

जमीन के समतलीकरण के साथ बाउंड्रीवाल के बाद जानवरों के रहने के लिए बाड़े भी बनाए जाएंगे। मिट्टी भराई पर 10 करोड़ खर्च होना था। अब उसकी लागत बढ़ कर 18 करोड़ हो गई है। उसके लिए अभी 8 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। जबकि बाउंड्रीवाल के लिए अभी 7.5 करोड़ और चाहिए।
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समय से कार्य न कराने के कारण कार्य कराने वाली फर्म को बदल दिया गया। अब धन के अभाव में कार्य की रफ्तार धीमी है। हाल ही में शासन से पांच करोड़ मिला है। उससे कार्य कराया जा रहा है। मिट्टी की भराई और बाउंड्रीवाल के बाद 40 से 45 बाड़े बनाए जाएंगे। चिड़िया घर के तीन हिस्से होंगे। एक हिस्से में जंगल होगा, दूसरे में पानी और तीसरे में बाड़े बनाए जाएंगे। जानवरों के लिए एक अस्पताल भी बनाया जाएगा। उसी के पास डाक्टरों की टीम भी रहेगी।

धन की कमी के कारण कार्य की रफ्तार धीमी है। अभी हाल में पांच करोड़ मिला है उससे कार्य कराया जा रहा है। अब भी यदि समय से धन मिल जाएग तो दो साल में चिड़िया घर पूरा हो जाएगा।
- आरआर जमुआर, मुख्य वन संरक्षक 

उद्यान में होंगे टाइगर और चीते भी
चिड़िया घर में तीस तरह के जानवर होंगे। उसमें टाइगर, चीते, हिरन सहित अन्य प्रमुख जानवरों को रखा जाएगा। मुख्य वन संरक्षक आरआर जमुआर ने बताया कि इन जानवरों को रखने के लिए बाड़े बनाए जा रहे हैं। इसके लिए केंद्रीय जू अथारिटी दिल्ली से अनुमति ली जाती है। वह जू के लिए अनुमति दे देती है।
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