कुलपति प्रो. अशोक कुमार और उनकी पत्नी प्रो. मधु कुमार का शिक्षकों ने अभिनंदन किया।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार का कार्यकाल 12 फरवरी को समाप्त हो रहा है। उम्मीद है कि इसके बाद वो महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में प्रबंध समिति के सदस्य का दायित्व निभाएं और कैंसर के शोध में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में रहते हुए शोध संबंधी कोई कदम नहीं उठा पाने का मलाल तो रहा, लेकिन तीन साल के कार्यकाल ने इतना कुछ सिखा दिया कि अब अकेले ही कोई भी विश्वविद्यालय संभाल लेंगे।
शनिवार को अपने आवास पर पत्रकारों से अपनी तीन साल के कार्यकाल की यादों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पिछले कई वर्षों से गोरखपुर विश्वविद्यालय के किसी भी कुलपति ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है। ऐसे में तीन साल का कार्यकाल पूरा करना ही उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने के साथ अन्य समस्याओं को दूर करना, छात्रसंघ चुनाव कराना, विश्वविद्यालय का नाम जिस महापुरुष पंडित दीनदयाल के नाम पर है उनकी प्रतिमा स्थापित करने की शुरुआत कराना, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कराना, सामाजिक दायित्व निभाते हुए जिला प्रशासन को नेपाल भूकंप पीड़ितों के लिए कैंप आयोजित करना, लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में जिला प्रशासन का सहयोग करना आदि उनके लिए एक न सिर्फ उपलब्धि की तरह है बल्कि अच्छी यादों की तरह रहेंगी। कहा कि आगे के लिए तीन विकल्प हैं, लेकिन उम्मीद है कि महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कैंसर शोध केंद्र की स्थापना का दायित्व निभाएं।
प्रो. पी नाग बन सकते हैं कुलपति
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि संभावना है कि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. पी नाग गोरखपुर विश्वविद्यालय के अगले कुलपति हों। प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि मौखिक सूचना के अनुसार प्रो. पी नाग को यह जिम्मेदारी दी जा रही है। संभवत: 13 फरवरी को उनको कार्यभार सौंपेंगे।