यूनिवर्सिटी गेट के मुख्य द्वार पर प्रचार करते छात्र।
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छात्रसंघ प्रत्याशियों पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से वैधता की मुहर लगते ही चुनावी माहौल सोमवार को काफी गर्म हो गया। जोश-खरोश में यूनिवर्सिटी परिसर और उसके बाहर शक्ति प्रदर्शन का ऐसा दौर चला कि चुनाव आचार संहिता तार-तार हो गई। छात्रों का तेवर देख लिंगदोह समिति की सिफारिशों को हर हाल में लागू कराने का दम भरने वाला यूनिवर्सिटी प्रशासन बैकफुट पर रहते हुए तमाशबीन की भूमिका में नजर आया।
सुबह ही दर्जन भर प्रत्याशी बारी-बारी से प्रॉक्टर के पास पहुंचे और परिसर में जुलूस निकालने की अनुमति मांगने लगे। प्रॉक्टर ने इसके लिए उन्हें चुनाव अधिकारी से पत्र हासिल करने की बाध्यता बताई तो थोड़ी ही देर इसे लेकर चुनाव कक्ष की हलचल बढ़ी दिखी। एक-एक कर अनुमति मिलती गई और परिसर का माहौल गरमाता गया। जुलूस की शक्ल में प्रत्याशी के साथ समर्थकों का हुजूम जब यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश करने लगा कि तो उनका उत्साह देख यूनिवर्सिटी और पुलिस प्रशासन ने किनारा कसना ही उचित समझा। प्रशासन की जो थोड़ी बहुत भूमिका समझ में आई वह गाड़ियों को प्रवेश न देने को लेकर थी।
जुलूस में यूनिवर्सिटी के पूर्व पदाधिकारियों की मुखर मौजूदगी प्रत्याशियों के साथ समर्थकों का हौसला भी बढ़ा रही थी। ये पूर्व पदाधिकारी अपने-अपने प्रत्याशियों को सलाह देते भी नजर आए। प्रत्याशी अपने बाहरी समर्थकों के साथ पूरे परिसर में घूमे और जमकर शक्ति प्रदर्शन हुआ। जुलूस के दौरान पैम्फलेट इस कदर उड़ाए गए कि कुछ ही देर में पूरे परिसर की सड़कें इससे पट गईं। जुलूस का यह सिलसिला दोपहर बाद तक चला। आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर जब प्रॉक्टर प्रो. सतीश पांडेय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि छात्रों का उत्साह इस कदर था कि किसी तरह की टोकाटाकी से माहौल बिगड़ सकता था, ऐसे में धैर्य से काम लिया गया।
चुनावी पैतरेबाजी का शुरू हुआ दौर
वोटरों को लुभाने के लिए चुनावी पैतरेबाजी का दौर शुरू हो गया है। प्रचार के लिए एनएसयूआई के राष्ट्रीय नेतृत्व की शहर में मौजूदगी और विद्यार्थी संपर्क ने अन्य प्रत्याशियों के खेमों में खलबली मचा दी। इसे लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और समाजवादी छात्रसभा ने भी अपने राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व में संपर्क साधा और टिप्स लिए। एबीवीपी के प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने ऑडियो क्लिप से अपना संदेश वोटरों तक पहुंचाने का कार्पोरेट तरीका अपनाया है। प्रत्याशी यथासंभव जातिगत गणित बैठाने में जुटे रहे। घर-घर संपर्क साधने के साथ-साथ दावतों का दौर भी खूब चल रहा है।