उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अभी तय नहीं हो पाया पर मंत्री बनने की दौड़ में शामिल नेताओं ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगानी शुरू कर दी है। अंचल के दर्जन भर से अधिक जनप्रतिनिधि अपने सरपरस्तों के यहां हाजिरी लगा चुके हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो अपने पुराने संबंधों को साधने में जुटे हैं तो कई दूसरों के माध्यम से अपनी अर्जी आगे बढ़ा रहे हैं।
प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष को तय करना है, पर मंत्रिमंडल में जगह बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। हर कोई अपनी सियासी गोटिंयां बिछाने में लगा है। बस्ती और गोरखपुर मंडल से कई ऐसे विधायक इस बार चुनकर आए हैं जो पिछली भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जबकि कई ऐसे हैं जो दूसरे दलों से आए हैं और उनकी सरकारों में मंत्री रहे हैं। ऐसे जनप्रतिनिधियों ने मंत्रिमंडल में जगह बनाने के लिए प्रदेश और देश की राजधानी में डेरा डाल दिया है। कई ऐसे हैं जो पूर्व सीएम से लेकर राष्ट्रीय नेताओं तक के दरबार में माथा टेक रहे हैं।
यह भी कयास लगाया जा रहा है कि उच्च सदन के सदस्य भी मंत्रिमंडल में शामिल होंगे। तीन बार सदन में पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि यहीं से ताल्लुक रखते हैं। माना जा रहा है कि उनका संबंध राष्ट्रीय स्तर के एक बड़े कद्दावर नेता एवं कैबिनेट मंत्री से है। प्रदेश संगठन के शीर्ष पदों पर रहने वाले एक विधायक की दावेदारी तो उनके समर्थक पक्का मान रहे हैं। इसके अतिरिक्त जातीय समीकरण में भी अति पिछड़ी जाति के एक विधायक मंडल से आते हैं। वह तीसरी बार विधायक बने हैं। एक विधायक खुद को विधानसभा अध्यक्ष बनाये जाने की बात अपने समर्थकों से कहते फिर रहे हैं। इसके अलावा भी कई पिछड़े व अति पिछड़े विधायक मंत्री बनने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं।