इस्लामिया कॉलेज में आयोजित मुशायरे में नगर विकास मंत्री आजम खां।
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यूं तो आजम खान इससे पहले भी कई बार गोरखपुर आ चुके हैं। कौमी सलामती काउंसिल के अध्यक्ष व सपा नेता जफर अमीन डक्कू का उनके करीबी होना भी किसी से छिपा नहीं, मगर शायद यह पहला मौका होगा जब आजम का यहां इतना जोरदार इस्तकबाल हुआ।
सर्किट हाउस से लेकर डक्कू के घर तक डेढ़ दर्जन चौराहों पर बाजे-गाजे के बीच फूल-मालाओं से उन्हें लाद दिया गया मगर पार्टी का कोई बड़ा पदाधिकारी कहीं दिखाई नहीं पड़ा। बाहर ये पदाधिकारी भले इसकी वजहें कुछ और बताते फिर रहे हों मगर भीतरखाने सभी में आक्रोश है। पोस्टर में पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी जगह न मिलने ने इसे और हवा दे दी। कुछ ने इसे मुद्दा बनाते हुए इसकी शिकायत शीर्ष नेतृत्व तक भी कर डाली।
क ाउंसिल के इस कार्यक्रम को कई सपाई ‘जौहर’ के नाम पर डक्कू का राजनीतिक जौहर मान रहे हैं। जिले की नौ विधानसभा सीटों में से सात पर प्रत्याशी घोषित होने के बाद ग्रामीण विधानसभा को लेकर दावेदारों की फेहरिस्त बढ़ गई है। पिछले चुनाव में इस विधानसभा सीट से दूसरे नंबर पर रहे डक्कू को इस बार टिकट न मिलने की पार्टी में चर्चा भी जोर पकड़ने लगी थी।
माना जा रहा है कि इन चर्चाओं पर विराम लगाने और अपनी दावेदारी मजबूत करने के ध्येय से ही डक्कू ने इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। रामपुर में जौहर अली विश्वविद्यालय का पूरी तरह से स्थापित होना भी कार्यक्रम का एक माध्यम बना। पार्टी को इससे पूरी तरह से दूर रखा गया और यही बात सपा के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अच्छी नहीं लगी। पोस्टर में मुलायम-अखिलेश को जगह न मिलने का मुद्दा आजम खान के आगे उठा तो वह भी बगले झांकने लगे। डक्कू के ही जवाब कि यह कार्यक्रम निजी था को, उन्होंने भी दोहरा दिया।
यही नहीं, जौहर अली के प्रति कौमी सलामती काउंसिल की संजीदगी भी कम चर्चा का विषय नहीं रही। मुशायरा स्थल और शहर में लगे कई बैनर और होर्डिंग पर लिखा था- शौकत अली जौहर, जबकि मोहम्मद अली और शौकत अली भाई थे। मोहम्मद अली की शायरी में रुचि की वजह से उन्हें तकल्लुस में जौहर बुलाया जाता था।