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गोरखपुर विश्वविद्यालय: पीएचडी के 110 अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त

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पीएचडी के 110 अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त
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गोरखपुर। पीएचडी की दाखिला प्रक्रिया में विवाद के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय की विभागीय शोध समिति ने राजनीति विज्ञान विभाग के 110 अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त कर दिया है। अब मेरिट सूची के हिसाब से विवि परिसर और संबद्ध डिग्री कॉलेजों की सीटें नए सिरे से भरी जाएंगी। वरिष्ठ शिक्षकों को रैंकवार अभ्यर्थी दिए जाएंगे। इससे पहले बॉटनी में पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया स्थगित की गई थी।
राजनीति विज्ञान विभाग की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू से विवादों में रही है। शोध पात्रता परीक्षा के आधार पर तैयार पीएचडी प्रवेश की सामान्य मेरिट सूची में छठवीं रैंक और ओबीसी संवर्ग में दूसरी रैंक होने के बाद भी अभ्यर्थी दीपक यादव को विवि का शोध सुपरवाइजर नहीं मिल सका। उन्हें कॉलेज में भेज दिया गया। इसके विपरीत 60, 62, 72, 88, 90 और 146 वीं रैंक के अभ्यर्थियों के लिए विवि परिसर के ही शोध सुपरवाइजर बना दिए गए। दीपक नेट उत्तीर्ण हैं, फिर भी मनमानी की गई। मामला बढ़ा तो कुलपति प्रो. वीके सिंह ने हस्तक्षेप किया। विभागाध्यक्ष से दाखिला प्रक्रिया पर जवाब भी मांगा।
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इसी का नतीजा रहा कि शनिवार को अभ्यर्थियों के शोध सुपरवाइजर की आवंटन सूची निरस्त कर दी गई। विभागाध्यक्ष प्रो. गोपाल प्रसाद का कहना है कि अब शिक्षक पसंद के अभ्यर्थियों के शोध सुपरवाइजर नहीं बन सकेंगे। हर शिक्षक को मेरिट और आरक्षण के हिसाब से अभ्यर्थी दिए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
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