कुवैत और नेपाल से आए साहित्यकारों, शिक्षकों ने रविवार को प्रेमचंद पार्क जाकर उनका घर देखा। साहित्यकारों ने कहा कि वह प्रेमचंद को पढ़ते रहे हैं और उनके साहित्य विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं लेकिन आज उनकी ‘कर्मभूमि’ देखकर सुखद अनुभव पाने का मौका मिला है। इससे हमें प्रेमचंद और उनके साहित्य को समझने की नई दृष्टि मिली है। प्रेमचंद के गोरखपुर आगमन के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में जुटे साहित्यकारों एवं शिक्षकों ने इप्टा की गोरखपुर इकाई द्वारा प्रस्तुत प्रेमचंद की कहानी ‘सौत’ का नाट्य मंचन भी देखा।
कुवैत यूनिवर्सिटी में हिंदी के शिक्षक डॉ. सईद रोशन, वहीं पर कार्यरत शायर, लेखक एवं मौर्य परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. अफरोज आलम, नेपाल की उर्दू एकेडमी के अध्यक्ष साकिब हारूनी रविवार सुबह 11 बजे प्रेमचंद पार्क पहुंचे। ये साहित्यकार एवं लेखक सोमवार को सेंट एंड्रयूज महाविद्यालय में प्रेमचंद पर आयोजित सेमिनार में भाग लेने के लिए आए हैं। प्रेमचंद साहित्य संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद स्वागत समारोह व नाट्य मंचन कार्यक्रम शुरू हुआ। सबसे पहले संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह ने प्रेमचंद के गोरखपुर से गहरे रिश्ते की विस्तार से जानकारी दी।
बताया कि गोरखपुर प्रेमचंद की निर्माण भूमि और कर्मभूमि दोनों हैं। यहां रावत पाठशाला व मिशन स्कूल में आठवीं तक पढ़ाई की। रेती चौक स्थित बुद्धिलाल बुकसेलर की दुकान पर दो-तीन वर्षों में उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी के ढाई सौ से अधिक उपन्यास व कहानियां पढ़ लीं। यहीं पर किशोर प्रेमचंद ने पहली कहानी भी लिखी। 16 अगस्त 1916 को प्रेमचंद नार्मल स्कूल में सहायक अध्यापक बनने पर गोरखपुर आए और वर्तमान में प्रेमचंद पार्क स्थित आठ कमरों वाले भवन में रहे। करीब पांच वर्षों के निवास के दौरान यहीं पर उनकी तमाम कहानियों व उपन्यास की पृष्ठिभूमि तैयार हुई। यहीं पर उनकी महान शायर फिराक गोरखपुरी और महावीर प्रसाद पोद्दार से मुलाकात हुई। महावीर ने उनकी रचनाएं हिंदी में छापीं।
इस मौके पर इप्टा ने डॉ. मुमताज खान के निर्देशन में प्रेमचंद की कहानी ‘सौत’ का नाट्य मंचन किया। यह नाटक रजिया नाम की स्त्री के स्वाभिमान, संघर्ष और त्याग की कहानी है। नाटक में रजिया की भूमिका रीना श्रीवास्तव, दसिया की भूमिका सोनी निगम और रामू महतो की भूमिका एस रफ त हुसैन ने निभाई। अन्य भूमिकाओं में धर्मेंद्र दूबे, विनोद चंद्रेश, आसिफ सईद, संजय सत्यम, तनवीर आजाद, मृत्युंजय शंकर सिन्हा आदि ने अभिनय किया। परिधान एवं मंच परिकल्पना सीमा मुमताज और रूप सज्जा राम बहाल ने की। इस मौके पर डॉ. अजीज अहमद, शायर डॉ. कलीम कैसर, कहानीकार रवि राय, वरिष्ठ पत्रकार अशोक चौधरी, विकास द्विवेदी, नितेन अग्रवाल, सुभाष पाल, बैजनाथ मिश्र, अंकुर सच्चर आदि मौजूद थे।