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मुंसिफी के नतीजे में चमकी शहर की मेधा

Sat, 06 Aug 2016 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
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अंशुमाली - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार देर शाम जैसे ही मुंसिफ मजिस्ट्रेट (पीसीएस-जे) का परिणाम घोषित किया, शहर के कई घरों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। जिले में र्कई विद्यार्थियों ने अपनी मेधा के बल पर सूची में सिर्फ जगह हासिल नहीं की बल्कि वरीयता सूची में उच्च स्थान हासिल कर शहर का मान बढ़ाया। खजनी क्षेत्र के कैथवलिया हरक सिंह गांव के अंशुमाली पांडेय को दूसरा स्थान हासिल हुआ।
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इसके अलावा कई और प्रतिभागियों ने भी परिणाम में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं पीपीगंज के नयनसर की रहने वाली तपस्या त्रिपाठी का भी चयन हुआ है। बिहार में जिला जज पद पर तैनात शैलेंद्र त्रिपाठी की बेटी तपस्या त्रिपाठी ने पहले प्रयास में ही यूपीपीसीएस जे की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने 17वीं रैंक हासिल की। उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ है। चयन की खबर पर परिवार और गांव खुशी का माहौल है।

तपस्या ने बीएचयू से बीए आनर्स, एवं एलएलबी में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी संमानित किया जा चुका है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कठिन परिश्रम एवं पिता के कुशल मार्ग दर्शन को बताया। संजय त्रिपाठी, धर्मेंद्र त्रिपाठी, शिवम, सत्यम त्रिपाठी, नरेंद्र दुबे समेत अन्य लोगों ने उन्हें बधाई दी है। एपीओ से जज बने अंशुमाली सिविल जज जूनियर डिविजन यानी मुंसिफी की परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल करने वाले अंशुमाली पांडेय का प्रतियोगी सफर एपीओ से शुरू होकर आखिरकार जज बनने के बाद पूरा हुआ। अंशुमाली ने यूपीपीएससी की ओर से 2011 में आयोजित सहायक अभियोजन अधिकारी यानी एपीओ की परीक्षा में सातवां स्थान हासिल किया था। इसी क्रम में वे फिलहाल मुरादाबाद पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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खजनी क्षेत्र के कैथवलिया हरक सिंह के रहने वाले प्रेम नारायण पांडेय व श्रीमती ज्ञानमती पांडेय के पुत्र अंशुमाली पांडेय ने अपनी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कुशीनगर से की है। वर्तमान में महानगर के दिव्य नगर कालोनी में रहने वाले अंशुमाली के पिता प्रेम नारायण कुशीनगर जिला न्यायालय में पेशकार रहे हैं। अंशुमाली पांडेय गोरखपुर यूनिवर्सिटी से बीए व एलएलबी तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलम की पढ़ाई प्रथम श्रेणी में पूरी करने के बाद प्रतियोगियों परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए। उन्होंने बताया कि उनकी सफलता का मूल मंत्र बाबा स्व. रामनरेश पांडेय का दिया हुआ वह मूल मंत्र है, जिसमें उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में न घबराने की प्रेरणा दी थी। डॉ. स्वतंत्र और अनीता भी बने जज पीसीएस-जे में सफल होने वाले शहर के मेधावियों की सूची में सहजनवां के भीटी रावत निवासी डॉ. स्वतंत्र सिंह राव और गायत्री नगर कूड़ाघाट की रहने वाली अनीता का नाम भी शामिल हैं। डॉ. स्वतंत्र को इससे पहले एपीओ की परीक्षा में भी सफलता मिल चुकी है। वर्तमान में ये मुरादाबाद पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। डॉ. स्वतंत्र ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से एलएलबी और एलएलएम की डिग्री हासिल करने के बाद 2015 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि हासिल की है। अपनी सफलता के पीछे वे पिता जगदीश सिंह रावत और बड़े भाई एडवोकेट विजय कुमार की भूमिका बताते हुए कहते है, उन्होंने किसी भी परिस्थिति में मनोबल नहीं गिरने दिया, हमेशा हौसलाफजाई करते रहे। अपने पहले ही प्रयास में न्यायिक सेवा के लिए चयनित अनीता ने वरीयता सूची में 23वां स्थान हासिल किया।
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