मेडिकल कालेज में लिफ्ट में फंसे मरीज को बाहर निकालते लोग।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही मरीजों पर काफी भारी पड़ रही है। कालेज में लिफ्ट तो लगा दिए गए हैं, मगर उसे चलाने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसकी वजह से आए दिन मरीज उसमें फंस रहे हैं। शनिवार की दोपहर करीब एक बजे हृदय रोगी नूर मोहम्मद (70) लिफ्ट में फंस गए। करीब बीस मिनट तक वह फंसे रहे। बाद में जानकारी होने पर पहुंचे कर्मचारी ने उन्हें बाहर निकाला।
मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 14 में भर्ती नूर मोहम्मद शनिवार को डिस्चार्ज हुए। घरवाले उन्हें सीढ़ी से ना लाकर लिफ्ट में लेकर चढ़ गए और बीच रास्ते में ही फंस गए। थोड़ी देर तक वे लोग नीचे नहीं पहुंचे तो उनका इंतजार कर रहे लोग परेशान हो गए। लिफ्ट में साथ आ रही एक तीमारदार ने फोन करके लिफ्ट फंसने की सूचना दी। पास में दवा बांट रहे फार्मासिस्ट को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने लिफ्ट संचालित करने वाले कर्मचारी को सूचना दी तब तक फंसे लोगों को लिफ्ट से निकाला जा सका।
मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट को चलाने के लिए अभी तक कर्मचारी की तैनाती नहीं हो सकी है। संविदा पर इन कर्मचारियों की तैनाती होनी है, लेकिन कॉलेज प्रशासन इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा है।
19 फरवरी : वार्ड नंबर तीन और सात के बीच एक घंटे फंसी रही कुशीनगर की महिला।
5 मार्च : मेडिसिन ओपीडी के पास स्ट्रेचर के साथ कुशीनगर की मरीज भागमनी देवी फंसी रही।
12 मार्च : पर्ची काउंटर के पास देवरिया की रानी लिफ्ट में आधे घंटे फंसी रहीं।
13 मार्च : दो लड़के लिफ्ट में करीब आधे घंटे तक फंसे रहें।
15 दिन से खराब है लिफ्ट
न्यू ओपीडी के पास लगी लिफ्ट बीते 15 दिनों से खराब पड़ी हुई है। इसके पहले भी दो लिफ्ट खराब थी जिसे ठीक कराया गया है, लेकिन न्यू ओपीडी के पास लगे लिफ्ट को अभी ठीक नहीं कराया जा सका है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इसे ठीक करा लिया जाएगा।