महिला अस्पताल में रात में कोई डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों की जान पर बन आ रही है। दिन में भर्ती मरीज को पहले तो सामान्य प्रसव का प्रयास शुरू हो रहा है मगर रात तक यदि मरीज की हालत बिगड़ी और ऑपरेशन की नौबत आ रही है तो उसे तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है। अब रात में अचानक रेफर होने पर तीमारदारों की समझ में नहीं आ रहा है कि वह कहां जाए। मेडिकल कॉलेज की दूरी ज्यादा होने पर वह प्राइवेट अस्पताल की ओर चले जा रहे हैं और खर्च से कर्ज में पहुंच रहे हैं।
205 बेड वाले महिला अस्पताल में स्त्री और प्रसूती रोग विशेषज्ञ के छह पद खाली हैं, जबकि तीन डॉक्टर लंबे समय से मेडिकल लीव पर हैं। ऐसे में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को हो रही परेशानी को दूर करने के लिए सीएमओ ने हेल्थ पोस्ट की छह डॉक्टरों तैनाती की थी, लेकिन सभी ने ड्यूटी करने से इन्कार कर दिया था। अब काफी प्रयास के बाद और रात में इमरजेंसी ड्यूटी से छूट मिलने पर दो डॉक्टर सोमवार को अस्पताल पहुंचीं। मगर नाइट ड्यूटी में डॉक्टर के न होने की वजह से मरीजों को सांसत झेलनी पड़ीं।
अस्पताल प्रशासन की ओर से इसके लिए कमिश्नर से लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तक पत्र लिखा जा चुका है मगर इसका समाधान नहीं हो पा रहा है। डॉक्टरों की मनमानी का आलम यह है कि पिपराइच और सहजनवां स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चार डॉक्टरों की ड्यूटी महिला अस्पताल में लगाने के साथ ही उन्हें रिलीव जा चुका है और प्रमुख सचिव सस्पेंड करने तक की चेतावनी दे चुके हैं मगर कोई फायदा नहीं हो सका है। एक तरह जननी को लेकर तमाम योजनाएं चल रही हैं वहीं जिलास्तर के अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं हैं।
केस-1
छोटेकाजीपुर की रहने वाली कंचन को घर वाले प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में दाखिल कराए थे। रात में साढ़े दस बजे अचानक बताया गया कि डॉक्टर नहीं हैं, मेडिकल कॉलेज लेकर जाइए। परेशान घर वाले प्राइवेट अस्पताल लेकर गए और रिश्तेदारों से रुपये लेकर इलाज करा रहे हैं।
केस-2
सिकरीगंज की रहने वाली श्वेता को घर वाले शनिवार की रात 11 बजे के करीब लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर न होने की वजह से उसे भर्ती ही नहीं किया गया है। सीधे यह कह दिया गया कि डॉक्टर नहीं हैं और मेडिकल कॉलेज जाइए। ठंड की रात में तीमारदार दो घंटे तक परेशान रहे।