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पशुओं का चारा ‘खा’ जा रहे हैं निगम के अधिकारी व कर्मचारी

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केवल भूसा-चोकर खिलाएंगे तो कितने दिन जिंदा रहेंगे पशु
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गोरखपुर। कान्हा उपवन गोवंश आश्रय स्थल में रखे गए पशुओं को तय खुराक के विपरीत भूसा और नाम मात्र को कभी-कभी हरा चारा दिया जा रहा है। महेवा वार्ड के पार्षद रामभुआल कुशवाहा ने नगर निगम कर्मियों पर यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे में उचित पोषक तत्व नहीं मिलने की वजह से पशु कमजोर हो रहे हैं और उनकी मौत तक हो जा रही है।
जानकारी के मुताबिक बृहस्पतिवार को भी दो पशुओं की मौत हुई है। इनमें एक गाय और एक बाछी है। पार्षद ने आरोप लगाया कि बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे तक पशुओं को चारा नहीं दिया गया था। चोकर भी कम मात्रा मिला। हरा चारा तो बस उतना ही दिया जा रहा है, जितना मंडी से सड़ी गली या फेंकी गई सब्जियां मिल पा रही हैं। रही बात पॉलिथीन खाने की वजह से मौत होने से तो यह सरासर गलत है, क्योंकि दो ढाई महीने पहले जिन पशुओं को पकड़ा गया है, उनकी मौत अब कैसे हो रही है ?
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शासनादेश के अनुसार गोवंश आश्रय स्थल में रखे गए पशुओं के भरण-पोषण के लिए प्रति 100 किलोग्राम वजन भार वाले हरेक पशु को हरेक दिन ढाई किलोग्राम भूसा या सूखा चारा, चार किलोग्राम हरा चारा और 500 ग्राम दाना मिश्रण (अनाज, खली, चोकर) का प्रावधान किया गया है, लेकिन शहर के गोवंश आश्रय ‘कान्हा उपवन’ के पशुओं को भूसा, हरा चारा के अलावा केवल चोकर दिया जा रहा है। दाना युक्त मिश्रण में चोकर के अलावा अनाज और खली का भी प्रावधान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्धारित मात्रा पशुओं के जीवित रहने के लिए जरूरी है। अगर इससे कम मात्रा में खाने की चीजें मिलती हैं तो उनका जीवन संकट में आ जाता है।
अब हरे चारे की नगर निगम ने की व्यवस्था
पिछले कुछ दिनों से नगर निगम की ओर से कान्हा उपवन में रखे गए पशुओं को केवल भूसा दिया जा रहा था, लेकिन पार्षदों की आपत्ति के बाद मंडी से हरे चारे के रूप में मंडी से बची हुई सब्जियां दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
भूसा में पोषक तत्व संबंधी कोई अवयव नहीं है। मिनरल और विटामिन आदि तो बिलकुल नहीं होता है। यह सिर्फ उनके पेट भरने में सहायक के तौर पर काम करता है। इसी वजह से 100 किलोग्राम भार वाले पशुओं के लिए न्यूनतम 2.5 किलोग्राम भूसा या सूखा चारा, 4 किलोग्राम हरा चारा और 500 ग्राम अनाज, खली और चोकर का मिक्स दाना का प्रावधान किया गया है। अगर केवल सूखा चारा दिया जाता है तो गोवंश आश्रय स्थल में रखे गए पशुओं को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाएगा और उनके जीवन पर संकट हो सकता है। दुधारू पशुओं के लिए यह मात्रा बदल जाती है।
- डॉ. डीके शर्मा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
कान्हा उपवन के पशुओं को निर्धारित मात्रा में ही चारा नहीं देने का आरोप गलत है। एक पशु को करीब दो किलो भूसा, हरे चारे के अलावा करीब डेढ़ किलो चोकर दिया जा रहा है। अधिकांश मौत उन पशुओं की हो रही है, जिनकी आयु 12 वर्ष से ज्यादा हो चुकी है। उनके पालक इनको ले नहीं जाते हैं। फिर भी उन पशुओं की उचित देखरेख की जा रही है। कोई भी व्यक्ति जब चाहे इसका निरीक्षण कर सकता है।
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अंजनी कुमार सिंह, नगर आयुक्त
गो आश्रय स्थलों की समीक्षा करेंगे डीएम
गोरखपुर। जिले में चल रहे गो आश्रय स्थलाें के प्रगति की समीक्षा बैठक शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगी। इसमें सीडीओ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सभी बीडीओ, नगर पंचायत के ईओ और अपर मुख्य अधिकारी भी शामिल होंगे। यह जानकारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी देवेंद्र शर्मा ने दी।
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