लेखपालों के आंदोलन को समर्थन देने वाले राज्य कर्मचारी महासंघ समेत आधा दर्जन विभागों के कर्मचारी संगठनों ने शुक्रवार को घोषणा की कि अगर जल्द लेखपालों की मांगे नहीं मानी गईं तो वे भी आंदोलन में शामिल हो जाएंगे। उधर, लेखपालों ने शुक्रवार को जिला प्रशासन के जरिए मुख्यमंत्री को एक सप्ताह में आंदोलन के तहत आयोजित विरोध कार्यक्रमों की रूपरेखा भेजी।
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष नीलकंठधर दूबे और जिला मंत्री जगदीश प्रसाद ने कहा कि हम अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक विरोध जता रहे हैं। वे हरगिज नहीं चाहते कि जनता परेशान हो। इसीलिए आंदोलन शुरू करने के पहले ही उन्होंने मांगों को लेकर कई बार शासन को आगाह किया था। बार-बार की सिफारिशों के बाद भी जब मांगें निरंतर खारिज होती रहीं तो मजबूरन उन्हें कार्यबहिष्कार कर आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी। उधर, कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे सभी लेखपालों ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मान ली जातीं वे पीछे नहीं हटने वाले।
लेखपाल 14 सितंबर को शहर में जुलूस निकालेंगे। 15 को रक्तदान कर विरोध जताएंगे। 19 को फिर मोटरसाइकिल रैली निकालेंगे और 20 से 72 घंटे का क्रमिक अनशन शुरू करेंगे। धरने में प्रमुख रुप से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव, राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष नंदलाल श्रीवास्तव, जिलामंत्री भारती समेत पीडब्ल्यूडी और मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ समेत कई विभागों के कर्मचारी संगठनों के नेता समर्थन में मौजूद रहे।
इस दौरान लवकुमार सिंह, रमाशंकर सिंह, दयानन्द मिश्रा, शिवनाथ पाण्डेय, रामनरायन सिंह, दुर्गा यादव, रामरेखा, रविंद्रनाथ त्रिपाठी, शशिभूषण सिंह, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, आरडी सिंह, पूर्णमासी प्रसाद, रामआसरे मिश्रा, विद्यासागर लाल श्रीवास्तव, शारदा प्रसाद व विश्वनाथ लाल आदि मौजूद रहे।