मेडिकल कॉलेज में विभागाध्यक्ष के अड़ियल रवैये से संविदा पर तैनात न्यूरो सर्जन का एक्सटेंशन नहीं किया जा सका। इस कारण ट्रामा सेंटर से लेकर ओपीडी की व्यवस्था ठप पड़ गई है। हालांकि प्राचार्य से भी संविदा डॉक्टरों की इस मसले पर बात हुई थी, जिसके बाद उन्होंने समस्या का हल निकालने का आश्वासन दिया था। लेकिन आलम यह है कि विभागाध्यक्ष और संविदा डॉक्टरों के बीच तनातनी से दूर-दराज से आ रहे मरीज बिना इलाज के ही लौट रहे हैं।
पूर्वांचल के इकलौते मेडिकल कॉलेज से अधिकांश वरिष्ठ डॉक्टरों का दूसरे मेडिकल कॉलेज तबादला हो चुका है। इस कारण यहां डॉक्टरों की कमी हो गई। इसे देखते हुए सरकार ने संविदा पर डॉक्टरों की तैनाती की थी। 27 जनवरी 2016 को पीजीआई के न्यूरो सर्जन डॉ. मुकेश शुक्ल ने संविदा पर कार्यभार संभाला था। डॉ. मुकेश ओपीडी और ट्रामा सेंटर में आने वाले एक्सीडेंट केस को भी हैंडल कर रहे थे। लेकिन न्यूरो विभागाध्यक्ष के मनमाने रवैए से 26 जनवरी को उनकी संविदा अवधि समाप्त हो गई।
डीजीएम के आदेश को भी दिखाया ठेंगा
डीजीएमई ने सभी संविदा डॉक्टरों का एक्सटेंशन करने का आदेश दिया था, लेकिन विभागाध्यक्ष ने आदेश को ठेंगा दिखाते हुए डॉ. मुकेश को एक्सटेंशन नहीं दिया। गुरुवार को भटहट निवासी सब्बीर 12 बजे न्यूरो विभाग में इलाज कराने आए थे लेकिन डॉक्टर न होने से वह निराश लौट गए। ऐसे ही 55 साल की हरपुर भीटी रावत की प्रभावती भी बिना इलाज वापस लौट गईं। प्रभावती ने लाचारी जताते हुए बताया कि एक बार आने पर 200 रुपये खर्च हो जाते हैं। बार-बार आने पर भी डॉक्टर के न मिलने पर निराश होकर लौटना पड़ता है।
एक्सटेंशन की स्वीकृति नहीं दी है, जिसकी वजह से मरीजों को दिक्कत आ रही है। संस्तुति कर डीजीएमई को पत्र भेजा गया है, जल्द ही समस्या दूर कर ली जाएगी।
- प्रो. राजीव मिश्र, प्रिंसिपल