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फर्जी शस्त्र लाइसेंस: सिर्फ यूआईएन ‘असली’, बाकी सब फर्जी

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फर्जी शस्त्र लाइसेंस: सिर्फ यूआईएन ‘असली’, बाकी सब फर्जी
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- वेबसाइट पर नाम-पता, लाइसेंस नंबर, असलहे का प्रकार असली लाइसेंसधारी का
- शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट हैक कर लेते तो बाकी जानकारी भी बदल देते जालसाज
अरुण चन्द
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करने के लिए जालसाजों के हाथ सिर्फ असली शस्त्र लाइसेंसधारियों के यूआईएन ही लगे हैं बाकी जितने भी दस्तावेज और आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है वह सब फर्जी मिल रहे हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने और उस पर शस्त्र खरीदने के मामले की जैसे-जैसे प्रशासनिक जांच आगे बढ़ रही है जालसाजी के इस खेल के सभी पैतरे भी सामने आने लगे हैं। फर्जी लाइसेंस तैयार करने वाले रैकेट के हाथ यूआईएन कैसे लगे यह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। लेकिन इसके पुख्ता प्रमाण जरूर मिल रहे हैं कि वे शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट नडाल और एलिस में छेड़छाड़ नहीं कर सके। यानी जैसा कि प्रशासन और मीडिया में वेबसाइट हैैक होना बताया जा रहा है वह सब आधारहीन है।
जानकारी के मुताबिक फर्जी लाइसेंस की बुकलेट पर 18 डिजिट के जितने भी यूनिक आईडेंटिटी नंबर (यूआईएन) अंकित किए गए हैं वेबसाइट पर उनकी जांच की गई तो उस पर शस्त्र लाइसेंस धारक का नाम, पता, फोटो, लाइसेंस नंबर, उसे जारी करने की तिथि के साथ ही लाइसेंस का प्रकार दूसरा दर्ज है। मसलन संबंधित यूआईएन पर असली लाइसेंसधारी का लाइसेंस डबल बैरल या सिंगल बैरल के लिए जारी हुआ था जबकि फर्जी लाइसेंस रिवाल्वर या पिस्टल के लिए जारी किए गए। यही नहीं फर्जी लाइसेंस पर जो यूआईएन की स्लिप चस्पा की गई है वह प्रथम दृष्टया ही देखने में फर्जी लग रही है। असली और नकली के प्रिंट में बहुत अंतर है। शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट से निकले सभी यूआईएन के स्लिप की प्रिंटिंग बिल्कुल साफ और स्पष्ट हैं जबकि फर्जी लाइसेंस पर चस्पा सभी स्लिप धुंधली है। उनके फांट में भी अंतर है। ऐसे में अगर जालसाज शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट तक पहुंच जाते तो वे सिर्फ यूआईएन ही नहीं चुराते बल्कि असली लाइसेंसधारी का नाम, पता, फोटो, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस जारी करने की तिथि आदि भी बदल देते जिससे प्रशासन और पुलिस की मुश्किलें और बढ़ जाती।
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केस- 1
विकास तिवारी (अभियुक्त फर्जी लाइसेंस कांड)
विकास तिवारी के पास से जो फर्जी लाइसेंस मिला है उस पर यूआईएन 335900021634182015 दर्ज है। उस पर लाइसेंस नंबर 6874 लिखा है जो 21 सितंबर 2010 को जारी किया गया है। जिला प्रशासन ने जब शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट नडाल पर इस यूआईएन को डालकर सर्च किया तो पता चला कि इस यूआईएन पर मोहिउद्दीन आजमी पुत्र अब्दुल साजिद पता खोराबार के नाम पर लाइसेंस है जिसका नंबर 2775 है। इसे 25 जनवरी 1968 को जारी किया गया था। यही नहीं इस यूआईएन पर एक नाली बंदूक का लाइसेंस जारी है। जबकि विकास का लाइसेंस रिवाल्वर/पिस्टल के लिए जारी हुआ है।
केस- 2
शिवम मिश्रा (अभियुक्त फर्जी लाइसेंस कांड)
शिवम मिश्रा के पास जो फर्जी लाइसेंस मिला है उस पर यूआईएन 335900021839882015 दर्ज है। उस पर लाइसेंस नंबर 5813 लिखा है जो सात जून 2009 को जारी किया गया है। जिला प्रशासन ने जब शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट पर यूआईएन से सर्च किया तो पता चला कि उस पर बनवारी लाल पुत्र रघुराम पता एनई रेलवे कॉलोनी के नाम से लाइसेंस है जिसका नंबर 2867 है। यह लाइसेंस 17 सितंबर 1971 को जारी किया गया था। यह लाइसेंस दो नाली बंदूक के लिए जारी है जबकि शिवम का फर्जी लाइसेंस रिवाल्वर/पिस्टल के लिए जारी हुआ है।
केस- 3
तनवीर (फर्जी लाइसेंस कांड का पहला अभियुक्त)
फर्जी लाइसेंस कांड में पकड़े गए पहले अभियुक्त गोरखनाथ थाना क्षेत्र निवासी तनवीर के लाइसेंस पर दर्ज यूआईएन 335900052148762015 है। इसे वेबसाइट पर सर्च किया गया तो नो रिकार्ड फाउंड लिखकर आ रहा है।
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31 मार्च 2019 से नडाल वेबसाइट पर फीडिंग बंद
31 मार्च 2016 तक जो भी शस्त्र लाइसेंस जारी हुए हैं या फिर वरासत हुए। उन सभी के रिकॉर्ड शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट नडाल पर अपलोड की गई है। लाइसेंस फीडिंग के लिए शासन स्तर से समय-समय पर इसे खोला जाता है। 31 मार्च 2019 से इस वेबसाइट पर फीडिंग बंद है। एक अप्रैल 2016 के बाद जितने भी लाइसेंस या वरासत हुए हैं उन्हें शस्त्र कार्यालय के ही एलिस वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। ये दोनों वेबसाइट एनआईसी के सर्वर से चलते हैं।
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वैध बड़ी बुकलेट, सभी फर्जी लाइसेंस की बुकलेट छोटी
सभी फर्जी लाइसेंस 2018 से जुलाई 2019 के बीच जारी किए गए। हालांकि उन पर जारी होने की तिथि 2009-10 के बीच की दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में शासन ने लाइसेंस का एक नियत प्रोफार्मा तय करते हुए जिला प्रशासन की तरफ से छपे लाइसेंस को ही मान्य बताया। इस लाइसेंस की बुकलेट की साइज बड़ी है जबकि जितने भी फर्जी लाइसेंस जारी हुए हैं वे सभी छोटी बुकलेट पर जारी किए गए हैं जो 2017 के पहले प्रचलन में थे।
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हैक नहीं की जा सकती शस्त्र वेबसाइट: एनआईसी प्रभारी
शस्त्र लाइसेंस कार्यालय की वेबसाइट नडाल और एलिस कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी के सर्वर से चलती है। एनआईसी प्रभारी व जिला सूचना विज्ञान अधिकारी रेखा गार्डिया का कहना है कि शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट नेशनल डेटा सेंटर पर इंस्टाल रहती है। इस तरह की जितनी भी संवेदनशील सरकारी वेबसाइट तैयार की जाती है उसके सिक्योरिटी रिस्क को लेकर गहनता से जांच होती है। ऑडिट होने के बाद ही वेबसाइट खोली जाती है। इसे सिर्फ वह ही खोल सकता है जिसके पास यूजर आईडी और पासवर्ड होगा। वेबसाइट के हैक होने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। ना ही ऐसी कोई शिकायत सामने आई है। नवीनीकरण से लेकर तमाम वजहों से वेबसाइट खोली जाती है। अगर ऐसी कोई गड़बड़ी होती तो सामने आती ही।
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जब यूजर आईडी-पासवर्ड ही पास हो तो हैक की क्या जरूरत
जिला प्रशासन की जांच में भी एक पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर का नाम सामने आया है। वहीं पुलिस और इस खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा रवि आर्म्स कार्पोरेशन का प्रोपराइट प्रकाश नारायण पांडेय का बेटा रवि पांडेय भी जेल जाने के पहले इस खेल में कई कर्मचारियों के साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर अजय गिरी का नाम ले चुका है। उसी के पास पहले शस्त्र कार्यालय की वेबसाइट का यूजर आईडी और पासवर्ड था। यूआईएन जारी करने और लाइसेंस पर उसे फीड करने का काम भी वहीं देखता था। ऐसे में जब जांच के दायरे में आए कंप्यूटर ऑपरेटर के पास ही यूजर आईडी और पासवर्ड है तो उसे तो आसानी से यूआईएन मिल सकता है। फिर इसके लिए वेबसाइट हैक करने की जरूरत ही नहीं है।
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