हर साल विधायकों की निधि में जहां लाखों रुपये यूं ही बच जाते थे वहीं इस बार तीन महीने पहले ही सभी ने अपने खाते खाली कर दिए। किसी की निधि में पांच सौ रुपये तो किसी के खाते में दो हजार रुपये ही बचे रह गए। खर्च करने में सहजनवां और खजनी सबसे आगे रहे। सहजनवां के बसपा विधायक ब्रजेश सिंह और बांसगांव के बसपा विधायक विजय कुमार की निधि में महज पांच-पांच सौ रुपये ही बचे हैं। सर्वाधिक 21 हजार रुपये चौरीचौरा के बसपा विधायक जय प्रकाश निषाद ने छोड़ रखे हैं। इसी तरह शहर विधान सभा के भाजपा विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल और सपा के ग्रामीण क्षेत्र के विधायक (पूर्व में भाजपा) विजय बहादुर यादव की निधि में दो-दो हजार रुपये ही बचे हैं।
सूत्रों के मुताबिक आचार संहिता के ठीक 20 दिन पहले कई विधायकों के प्रस्ताव आने से ग्राम्य विकास विभाग के अफसर-कर्मचारी हांफने लगे थे। मामला जनप्रतिनिधियों का था, लिहाजा दौड़-भाग कर सर्वे आदि की जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं, तब रकम जारी हुई। कुछ के खातों में लाख-दो लाख पड़े थे तो उन्होंने दिसंबर 2016 के आखिरी सप्ताह में खड़ंजा आदि के निर्माण में रुपये खपा दिए। कुछ विधायकों ने दिसंबर महीने में 10 लाख रुपये से अधिक के कामों के प्रस्ताव भेजे। यही नहीं, कुछ के प्रस्ताव तो खाते में पर्याप्त रकम न होने से लौटाने पड़े। बता दें कि हर साल विधायक निधि के तौर पर डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये मिलते हैं।
ज्यादातर विधायकों की निधि खाली हो गई है। जिनक ी निधि में रुपये थे, उनमें से कई लोगों ने दिसंबर महीने में प्रस्ताव भेजकर काम करा डाले।
-डॉ मन्नान अख्तर, सीडीओ
विधायक निधि में बची रकम
पिपराइच 17 हजार
चिल्लूपार 16 हजार
खजनी 4 हजार
कैंपियरगंज 3 हजार
चौरीचौरा 21 हजार
ग्रामीण 2 हजार
सहजनवां 500 रुपये
बांसगांव 500 रुपये
शहर 2 हजार