विद्यार्थियों की सुविधा के लिए प्रदेश सरकार ने वजीफे और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगा था। लेकिन जिले के ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों के विश्वविद्यालयों और कॉलेजो ने यहां के विद्यार्थियों के आवेदन को लेकर हाथ खड़े कर लिए हैं। यही वजह है कि इस बार दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तरांचल, हरियाणा आदि प्रदेशों में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे यहां के विद्यार्थियों को वजीफा दिलाने के लिए वहां की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों ने गिनती के ही आवेदन किए हैं। समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार के मुताबिक इस साल सिर्फ 47 आवेदन ही मिले हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा सैकड़ों में होता था।
दरअसल पहले सीधे संबंधित यूनिवर्सिटी और कालेजों को यह रकम भेज दी जाती थी। मगर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में बढ़े घोटालों को लेकर शासन ने सीधे विद्यार्थियों के ही खाते में रकम भेजने के लिए सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी। महकमे का मानना है कि यूनिवर्सिटी और कालेजों की लापरवाही के अलावा यह भी वजह है कि उन्होंने यहां के विद्यार्थियों को यह मदद दिलाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। क्योंकि यहां के विद्यार्थियों को वजीफे दिलाने के लिए इन यूनिवर्सिटी और कालेजों को पहले गोरखपुर के समाज कल्याण विभाग वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। फिर छात्रों का आवेदन कराना होता है और उसकी एक हार्ड कॉपी जिले को भेजनी होती है।
इस हार्ड कॉपी से यहां का समाज कल्याण विभाग संबंधित विद्यार्थियों की जांच कराता है कि वे यहीं के रहने वाले हैं या नहीं। जांच में सब कुछ ओके मिलने पर यहां से महकमा शासन को रिपोर्ट भेजता है और फिर सीधे खाते में रकम भेजी जाती है। मगर बाहर की यूनिवर्सिटी और कालेज प्रशासन की लापरवाही से छात्रों को यह मदद नहीं मिल पाती। समाज कल्याण विभाग के मुताबिक इसके लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच ही आवेदन करने होते हैं।